ग्वालियर की लश्कर कृषि उपज मंडी में हुए कथित एक लाख क्विंटल धान घोटाले के मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को हाईकोर्ट की युगल पीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इस पूरे मामले पर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी पर्यावरण संरक्षण के तहत आनंद पर्वत पर 10 पौधे लगाने का आदेश दिया है।
क्या है मामला?
यह मामला जनहित याचिका के जरिए सामने आया, जिसे शिवेंद्र प्रताप सिंह ने दाखिल किया था। उनकी ओर से अधिवक्ता अभिनव भार्गव ने दलील दी कि लश्कर मंडी में लगभग एक लाख क्विंटल धान का घोटाला हुआ है। जांच के दौरान करीब 32 हजार क्विंटल धान बरामद किया गया, जबकि बाकी धान अलग-अलग वेयरहाउसों में रखे होने की बात कही जा रही है। बरामद धान की नीलामी से करीब 7 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जो कलेक्टर के नाम से जमा कराए गए हैं। लेकिन अब तक किसानों को एक पैसा नहीं मिला।
किसानों के साथ बड़ा अन्याय
याचिका में कहा गया कि यह पैसा असल में किसानों का है। कलेक्टर की तैयार की गई सूची में सिर्फ 793 किसानों के नाम दर्ज हैं, जबकि मंडी में करीब 2000 किसानों ने धान बेचा था। यानी आधे से ज्यादा किसानों का नाम सूची में ही नहीं है।
साथ ही याचिका में सिंह ट्रेडर्स से जुड़े करीब 95 हजार क्विंटल धान के एक और घोटाले का जिक्र किया गया है। मंडी सचिव ने इस मामले में जनकगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कैसे हुआ पूरा खेल
मामले में जिन तीन फर्मों भूपेंद्र धाकड़, कल्याण यादव और एक अन्य का नाम आया है, उन्होंने अक्टूबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच किसानों से बड़ी मात्रा में धान खरीदा। किसानों को बताया गया कि जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन बाद में उन्होंने वही धान वेयरहाउस में रखकर उस पर बैंक से कर्ज ले लिया। जब किसानों ने भुगतान नहीं मिलने की शिकायत कलेक्टर से की, तब जाकर प्रशासन ने धान को सीज कर दिया।
अब अगला कदम कोर्ट के आदेश पर
अब हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य शासन से विस्तृत जवाब तलब किया है कि आखिर किसानों को भुगतान क्यों नहीं किया गया और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई हुई। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि इस घोटाले की परतें जल्द खुल सकती हैं।
