ग्वालियर की बदहाल सड़कों की कहानी कोई नई नहीं है। महीनों से गड्ढों, धंसे रास्तों और उखड़ी सड़कों से जूझ रहे शहरवासियों की शिकायतें फाइलों में ही दबकर रह गई थीं। हालात ऐसे थे कि रोजमर्रा की आवाजाही भी जोखिम भरी हो चुकी थी। जैसे ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के ग्वालियर दौरे की खबर सामने आई, शहर की तस्वीर अचानक बदलती नजर आने लगी। सूर्य नमस्कार तिराहे से आकाशवाणी चौराहे तक का मुख्य मार्ग, जो बरसात के बाद से जर्जर हालत में था, अब अचानक चमकने लगा है।
इसी रास्ते से अमित शाह के अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक निवास जाने की संभावना है। इसीलिए यहां दिन-रात मशीनें दौड़ रही हैं और डामर बेस्ड सड़क तैयार की जा रही है। महीनों तक उपेक्षित रहा यही मार्ग अब वीआईपी मूवमेंट के कारण प्राथमिकता में आ गया है।
लोगों का तंज
सड़क बनते देख स्थानीय लोग हैरानी और व्यंग्य दोनों जता रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय क्षेत्र के एक निवासी ने तंज कसते हुए कहा कि सालों से खराब सड़कों पर किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन बड़े नेता के आने से दो दिन में सब ठीक हो गया। लोगों का कहना है कि अगर यही रफ्तार पहले दिखाई जाती, तो शहर को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। शहर का पॉश इलाका माने जाने वाला सचिन तेंदुलकर मार्ग करीब एक साल से बदहाल है। यहां सड़क टूटने के साथ धूल का गुबार उड़ता रहता है, जिससे रहवासी खासे परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सड़क और धूल के कारण सांस और आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।
280 सड़कों की हकीकत
ग्वालियर की सड़कों का मुद्दा पहले भी राजनीतिक गलियारों में गूंज चुका है। चेतकपुरी से नदी गेट तक कई सड़कें धंस गई थीं। हालात तब और गंभीर हुए, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निवास मार्ग की सड़क भी बैठ गई। इसके बाद प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने स्कूटर से शहर का निरीक्षण किया, जिसमें सामने आया कि करीब 280 सड़कें खराब हालत में हैं। सिंधिया ने नवंबर और फरवरी 2026 तक सड़कों को सुधारने का लक्ष्य जरूर तय किया, लेकिन जमीनी हालात में खास फर्क नहीं दिखा। कई जगह काम कागजों तक सीमित रहा, जिससे जनता का भरोसा कमजोर हुआ।
सियासत भी गर्म
विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। कांग्रेस के प्रदर्शन, रैलियां और सोशल मीडिया पोस्ट ने ग्वालियर की सड़कों को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया। विपक्ष का आरोप है कि अब सड़कें इसलिए बन रही हैं, क्योंकि सत्तापक्ष के बड़े नेता आने वाले हैं। सवाल यही है कि क्या वीआईपी दौरे के बाद भी यही रफ्तार बनी रहेगी, या फिर मशीनें दोबारा शांत हो जाएंगी।
