भारतीय रेलवे (Indian Railways) में सफर करने वाली अकेली महिला यात्रियों के लिए अब सुरक्षा सिर्फ एक वादा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखती व्यवस्था बन चुकी है। रेलवे सुरक्षा बल की ‘मेरी सहेली’ टीम ट्रेनों के भीतर जाकर महिलाओं से सीधे संवाद कर रही है और उन्हें यह भरोसा दिला रही है कि सफर के दौरान वे अकेली नहीं हैं। यह पहल देशभर में लागू है, लेकिन झांसी मंडल में इसे विशेष प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है।
ग्वालियर आरपीएफ की महिला कर्मी जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर पहुंचती है, वैसे ही प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो जाती हैं। टीम के पास टैबलेट होता है, जिसमें ट्रेन में अकेले सफर कर रही महिला यात्रियों की पूरी जानकारी पहले से दर्ज रहती है। इसके बाद टीम सीधे कोच में जाकर यात्रियों से मिलती है और उनकी स्थिति के बारे में पूछताछ करती है।
मिलती है जानकारी
‘मेरी सहेली’ योजना पूरी तरह रियल टाइम तकनीक पर आधारित है। जैसे ही कोई ट्रेन दिल्ली से रवाना होती है, अकेली महिला यात्रियों का डेटा ऐप में अपडेट हो जाता है। दिल्ली, मथुरा, आगरा, ग्वालियर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर तैनात टीमें इस जानकारी के आधार पर यात्रियों से संपर्क करती हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। टीम को सबसे अधिक शिकायतें सीट या बर्थ बदलने को लेकर मिलती हैं। कई बार महिला यात्रियों की समस्या टीटीई तक पहुंचने में देरी हो जाती है, लेकिन ‘मेरी सहेली’ टीम मौके पर ही हस्तक्षेप कर समाधान कराती है। इससे महिलाओं को तुरंत राहत मिलती है और वे खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं।
परिजनों तक पहुंचता है भरोसा
कई महिला यात्री टीम की मौजूदगी में अपने परिजनों से फोन पर बात करती हैं। इससे घरवालों को यह भरोसा मिल जाता है कि उनकी बेटी, बहन या पत्नी सुरक्षित हाथों में है। यह छोटा सा संवाद महिलाओं के मनोबल को भी मजबूत करता है। पिछले 2 महीनों में ‘मेरी सहेली’ टीम ने बड़ी संख्या में महिला यात्रियों से संपर्क किया है। अक्टूबर माह में 813 ट्रेनों के माध्यम से 4,318 महिलाओं से संवाद किया गया। वहीं नवंबर में यह आंकड़ा बढ़कर 531 ट्रेनों में 8,052 महिला यात्रियों तक पहुंच गया।
RPF का भरोसा और सतर्कता
आरपीएफ टीआई मनोज शर्मा के अनुसार, ‘मेरी सहेली’ टीम की वजह से महिला यात्रियों में सुरक्षा का भाव बढ़ा है। महिला कर्मी लगातार ट्रेनों पर नजर रखते हुए हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही हैं। उनका कहना है कि यह पहल केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है। ‘मेरी सहेली’ अब सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि महिला यात्रियों के लिए भरोसे का नाम बनती जा रही है। रेल सफर में यह पहल सुरक्षा के साथ-साथ संवेदनशीलता और विश्वास की मिसाल पेश कर रही है।
