ग्वालियर में साइबर ठगों ने एक 75 वर्षीय रिटायर्ड उप पंजीयक को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.12 करोड़ रुपए की ठगी का शिकार बना लिया। खेड़ापति कॉलोनी निवासी बिहारी लाल गुप्ता के पास 16 नवंबर 2025 को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई (TRAI) अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका मोबाइल नंबर और आधार बंद होने वाला है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी आदेश जारी हो चुके हैं।
ट्राई अधिकारी की बात खत्म होने के कुछ ही मिनट बाद व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाला युवक पुलिस की वर्दी में था और उसने खुद को IPS नीरज ठाकुर बताया। उसने कहा कि एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में पकड़े गए आरोपी ने बयान दिया है कि दो लाख रुपए लेकर गुप्ता का ICICI बैंक खाता खरीदा गया, जिसका इस्तेमाल करोड़ों के अवैध लेनदेन में हुआ है।
ग्वालियर में रिटायर्ड उप पंजीयक
फर्जी IPS अधिकारी ने बुजुर्ग से परिवार, संपत्ति और बैंक बैलेंस की जानकारी ली। इसके बाद कहा गया कि उम्र का लिहाज करते हुए तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जा रही है, लेकिन “प्री-इन्वेस्टिगेशन” जरूरी है। इसके लिए एक आवेदन लिखवाकर उसी के व्हाट्सऐप नंबर पर भेजवा लिया गया। इसके बाद खुद को CBI अधिकारी प्रदीप सिंह बताने वाले व्यक्ति का कॉल आया। उसने कहा कि मामले की जांच के लिए खाते में जमा रकम, एफडी और म्यूचुअल फंड को RBI जांच के लिए ट्रांसफर करना होगा। भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होते ही सारा पैसा वापस मिल जाएगा। साथ ही चेतावनी दी गई कि किसी को कुछ बताया तो तुरंत गिरफ्तारी होगी।
ट्रांसफर हुए 1.12 करोड़
डर और दबाव में आकर गुप्ता ने चार बार में कुल 1.12 करोड़ रुपए ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। हर ट्रांजैक्शन के बाद उन्हें RBI की मुहर लगा एक फर्जी रिसीविंग लेटर व्हाट्सऐप पर भेजा जाता था, जिससे उन्हें लगता रहा कि पैसा सुरक्षित है। 3 जनवरी 2026 को आखिरी ट्रांजैक्शन के बाद दो दिन पहले मोबाइल पर एक जागरूकता वीडियो देखने पर उन्हें समझ आया कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। इसके बाद जब उन्होंने कॉल और व्हाट्सऐप नंबरों पर संपर्क किया तो सभी नंबर बंद मिले।
क्राइम ब्रांच में केस दर्ज
पीड़ित ने एसएसपी ग्वालियर से शिकायत की, जिसके बाद क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि ठगों की पहचान और पैसों की ट्रेल खंगाली जा रही है।
