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बदले हुए अंदाज में नववर्ष की सुबह, ग्वालियर में नशे के खिलाफ अनोखी पहल

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Published On: 1 January 2026

ग्वालियर में नए साल की शुरुआत इस बार शोर-शराबे या जश्न की भीड़ से नहीं, बल्कि एक सकारात्मक सोच के साथ हुई। शहर के इंदरगंज चौराहे पर नशे के खिलाफ एक अनोखी पहल देखने को मिली, जिसने राह चलते लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यहां नए साल के पहले दिन सुबह से ही ऐसा दृश्य था, जो आमतौर पर देखने को नहीं मिलता। इस अभियान को एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी ने यातायात पुलिस के सहयोग से अंजाम दिया। नववर्ष पर शराब को बढ़ावा देने वाली सोच के बजाय स्वस्थ विकल्प को सामने लाना। इसी सोच के तहत चौराहे पर एक बड़ा पंडाल लगाया गया और लोगों को रुकने, सोचने और संदेश समझने का मौका दिया गया।

पंडाल के भीतर करीब दो क्विंटल केसर वाला गर्म दूध तैयार कराया गया, जिसे आने-जाने वाले लोगों को नि:शुल्क पिलाया गया। ठंड के मौसम में दूध की खुशबू और गर्माहट ने लोगों को स्वतः ही आकर्षित किया। कई लोग उत्सुकता में रुके, तो कई संदेश से प्रभावित होकर कतार में लग गए।

ग्वालियर में बैनरों से दिया संदेश

पंडाल के बाहर लगाए गए बड़े-बड़े बैनरों पर साफ शब्दों में लिखा था, “दारू से नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत।” यही पंक्तियां साउंड सिस्टम के जरिए भी बार-बार सुनाई दे रही थीं। संदेश सरल था, लेकिन असरदार, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। आयोजकों ने बताया कि हर साल नए साल पर शराब के अत्यधिक सेवन से सड़क हादसे, घरेलू विवाद और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसी चिंता को देखते हुए यह प्रयोग किया गया, ताकि समाज खासकर युवा वर्ग नशे के नुकसान को समझे और सेहतमंद विकल्प को अपनाए।

दूध के बहाने संवाद

दूध पीने आए लोगों से बातचीत के दौरान उन्हें समझाया गया कि नशा व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करता है। इसके विपरीत दूध जैसे पौष्टिक आहार शरीर को मजबूत बनाते हैं। कई लोगों ने माना कि संदेश सीधे दिल को छूने वाला था। जैसे-जैसे लोगों को इस पहल की जानकारी मिली, दूध पीने वालों की संख्या बढ़ती गई। कुछ देर में ही चौराहे पर लंबी कतारें नजर आने लगीं। कई युवाओं और बुजुर्गों ने इस तरह की मुहिम को समाज के लिए जरूरी बताया।

यातायात पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर मौजूद लोगों से अपील की कि वे जिम्मेदारी के साथ नववर्ष मनाएं, नशे में वाहन न चलाएं और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें। ग्वालियर की यह पहल नए साल पर एक सादा लेकिन मजबूत संदेश देकर मिसाल बन गई।

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