ग्वालियर अंचल के डबरा में एक ऐसा मंदिर आकार ले चुका है, जिसने धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर इस कस्बे को खास पहचान दिला दी है। 12 एकड़ में फैला यह नवग्रह मंदिर न सिर्फ आकार में विशाल है, बल्कि अपनी अवधारणा के कारण भी अलग नजर आता है। यहां नवग्रह अकेले नहीं, बल्कि अपनी पत्नियों के साथ विराजमान हैं, जो इसे एशिया में विशिष्ट बनाता है। मंदिर की रचना 108 खंभों पर की गई है, जिसे संयोग नहीं बल्कि शास्त्रीय गणना कहा जा रहा है। वैदिक परंपरा के अनुसार, 27 नक्षत्र और उनकी चार दिशाएं मिलकर 108 का स्वरूप बनाती हैं। यही कारण है कि मंदिर की पूरी संरचना इसी संख्या के इर्द-गिर्द गढ़ी गई है, ताकि ब्रह्मांडीय संतुलन की भावना बनी रहे।
यहां हर ग्रह को ऐसा स्थान दिया गया है कि किसी की सीधी दृष्टि दूसरे पर न पड़े। ज्योतिषीय अध्ययन के बाद तय की गई यह व्यवस्था मंदिर को सामान्य धार्मिक स्थल से अलग करती है। सूर्य मंदिर के आसपास विशेष रूप से जल संरचनाएं बनाई गई हैं, ताकि ऊर्जा का संतुलन बना रहे और तेज नियंत्रित रहे।
डबरा में आस्था का ब्रह्मांड
मंदिर परिसर को तीन तलों में विभाजित किया गया है। भू-तल पर आठ ग्रहों की संगमरमर प्रतिमाएं स्थापित हैं। पहले तल पर सूर्य देव अष्टधातु की प्रतिमा में अपनी पत्नियों के साथ विराजमान हैं, जहां प्रवेश द्वार पर सात अश्व श्वेत संगमरमर में उकेरे गए हैं। दूसरे तल पर ग्रहों से जुड़े देवताओं की स्थापना की गई है। हर ग्रह की प्रतिमा उसके पारंपरिक रंग में बनाई गई है। प्रत्येक मंदिर द्वार पर संबंधित ग्रह का मंत्र अंकित है, जिससे दर्शन के साथ साधना का भाव भी जुड़ता है। यह व्यवस्था श्रद्धालुओं को केवल देखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ती है।
जल परिक्रमा से ऊर्जा संतुलन
मंदिर के बराबर क्षेत्रफल में बना सरोवर इसकी खास पहचान है। सरोवर का जल मंदिर की परिक्रमा करता हुआ पुनः उसी में लौटता है। मान्यता है कि जल सूर्य ऊर्जा को संतुलित करता है, इसलिए इस जल-व्यवस्था को मंदिर की आत्मा माना जा रहा है। मंदिर का निर्माण द्रविड़ स्थापत्य शैली में किया गया है। वर्गाकार आधार, पिरामिडनुमा शिखर, विस्तृत प्रांगण और गोपुरम इसकी पहचान हैं। परिसर में जलकुंड, दीप स्तंभ और ध्वज स्तंभ इस शैली को और प्रभावशाली बनाते हैं।
प्राण प्रतिष्ठा से बढ़ेगा आकर्षण
आगामी 11 से 20 फरवरी के बीच प्रस्तावित प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। डबरा अब ग्वालियर-ओरछा धार्मिक मार्ग में एक नई, भव्य कड़ी के रूप में उभरता दिख रहा है।
