नए साल के पहले दिन ग्वालियर में सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खुल गए। शहरवासियों ने 2026 की शुरुआत भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना से की। लोगों की मान्यता रही कि अगर साल का पहला दिन भक्ति से शुरू हो, तो पूरा वर्ष सुख-शांति और समृद्धि से भरा रहता है। अचलेश्वर, कोटेश्वर, मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, खेड़ापति, मांढ़रे की माता और गिरगांव महादेव मंदिरों में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी। श्रद्धालुओं ने अभिषेक किया, बेलपत्र और फूल चढ़ाए और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
मंदिरों के बाहर सिर्फ पूजा ही नहीं, बल्कि सेवा का भाव भी दिखाई दिया। कई भक्तों और सामाजिक संगठनों ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को चाय, भोजन, गर्म कपड़े और आर्थिक मदद दी। लोगों का कहना था कि नए साल की शुरुआत अगर किसी की मदद से हो, तो साल और भी सार्थक बन जाता है।
ग्वालियर: आश्रमों में बच्चों संग मनाया जश्न
शहर के विभिन्न अनाथ और सेवा आश्रमों में भी नए साल का रंग नजर आया। समाजसेवी संगठनों के सदस्य माधव अंधाश्रम, नारी निकेतन, कुष्ठ आश्रम सहित अन्य संस्थानों में पहुंचे। बच्चों को उपहार, मिठाइयां और नए कपड़े बांटे गए। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान देखकर लोग भावुक भी हुए। दर्शन करने पहुंची अनिका शिवहरे ने बताया कि उन्होंने दिन की शुरुआत भगवान के दर्शन से की और पूरे साल के लिए सकारात्मक ऊर्जा की कामना की। देवेंद्र निगम ने कहा कि वह हर साल नए साल की शुरुआत मंदिर जाकर करते हैं, क्योंकि इससे मन को शांति मिलती है।
सुख-शांति की कामना
थाटीपुर से आई बुजुर्ग महिला पुष्पा सैनी ने कहा कि वह अपने परिवार की सुख-शांति और स्वास्थ्य के लिए बाबा अचलनाथ के दर्शन करने आई हैं। वहीं, ममता ने बताया कि उनका नया साल भगवान जगन्नाथ के दर्शन से शुरू हुआ, जिससे उन्हें आत्मिक संतोष मिला। मंदिर परिसरों और समाजसेवी आयोजनों के दौरान लोगों को यह भी संदेश दिया गया कि नए साल का उत्सव नशे से दूर रहकर और जिम्मेदारी के साथ मनाया जाए। ग्वालियर में नए साल का पहला दिन यह साबित करता दिखा कि आस्था और सेवा के साथ मनाया गया जश्न सबसे सच्चा होता है।
