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भागीरथपुरा जल संकट: डेथ ऑडिट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 15 मौतें दूषित पानी से होने की पुष्टि

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Published On: 16 January 2026

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। अब तक सामने आई डेथ ऑडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 24 मौतों में से 21 मामलों का ऑडिट किया गया, जिनमें 15 लोगों की मौत का सीधा कारण दूषित पानी पाया गया है। इन 15 में एक पांच माह का मासूम बच्चा भी शामिल है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

इस पूरे मामले में प्रशासनिक आंकड़ों में लगातार बदलाव होता रहा। शुरुआत में प्रशासन ने केवल चार लोगों की मौत दूषित पानी से होने की पुष्टि की थी। इसके बाद यह संख्या छह बताई गई, लेकिन समय के साथ मौतों का आंकड़ा बढ़कर 24 तक पहुंच गया। इसी बीच हाई कोर्ट ने 15 जनवरी को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए, जिसके बाद 13 जनवरी को 21 मौतों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट तैयार की गई।

भागीरथपुरा जल संकट

डेथ ऑडिट में यह भी स्पष्ट किया गया कि अशोक (62), शंकरलाल (75), कमला (60) और सुनीता (49) की मौतें सीधे तौर पर दूषित पानी से नहीं जुड़ी पाई गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि इन मामलों में अन्य चिकित्सकीय कारण प्रमुख रहे, हालांकि इन पर पूरी तरह से संदेह भी खत्म नहीं हुआ है।

कमला (60) को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और घबराहट की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें पहले से ब्लड प्रेशर की समस्या थी और मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया। वहीं सुनीता (49) को उल्टियां, सांस लेने में तकलीफ, कम हीमोग्लोबिन और पहले से किडनी से जुड़ी बीमारी थी। उन्हें कई बार सीपीआर दिया गया, लेकिन अंततः उनकी भी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई। इन दोनों मामलों में दूषित पानी की भूमिका को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।

दूषित पानी से जुड़ा

रिपोर्ट में जिन 15 लोगों की मौत दूषित पानी से होने की पुष्टि हुई है, उनमें उर्मिला (60), ताराबाई (65), नंदलाल (70), हीरालाल (65), अरविंद निकर (43), अव्यान (5 माह), मंजूला (65), गीताबाई (64), उमा कोरी (31), गोमती, श्रावण (80), सीमा (40), जीवनलाल (80), रामकली (47) और हरकुंवर बाई (81) शामिल हैं।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

डेथ ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता की जांच और आपूर्ति व्यवस्था सुधारी जाती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जिम्मेदारों पर होने वाले कदमों पर टिकी हैं।

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