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इंदौर के भागीरथपुरा में पानी बना जानलेवा, 17 मौतों के बाद भी डर कायम; आरओ बना लोगों की मजबूरी

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Published On: 5 January 2026

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी ने भयावह रूप ले लिया है। अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग अभी भी बीमार हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों के मन में नर्मदा, टैंकर और बोरिंग तीनों तरह के पानी को लेकर गहरा डर बैठ गया है। बीमारी और मौतों के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। इलाके के लोग अब नर्मदा के पानी को भी भरोसे के लायक नहीं मान रहे हैं। टैंकरों से आ रहे पानी को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। रहवासियों का कहना है कि कई टैंकरों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है, जिससे लोग उसका इस्तेमाल करने से बच रहे हैं।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब जांच में बोरिंग का पानी भी दूषित पाया गया। शहर में लिए गए सैंपलों में से 35 सैंपल फेल हो गए, जिन्हें पीने योग्य नहीं माना गया। इसके बाद प्रशासन ने भागीरथपुरा क्षेत्र की 516 बोरिंग्स के पानी के उपयोग पर रोक लगा दी। इनमें 400 निजी और 116 सरकारी बोरिंग शामिल हैं।

इंदौर निगम जांच में जुटा

रविवार को निगम ने 112 पानी की टंकियों, नलों और बोरिंग्स के सैंपल लिए। इनकी जांच निजी लैब में कराई जा रही है। निगम की अपनी लैब होने के बावजूद कर्मचारियों की कमी के कारण जांच का काम बाहर की लैब को सौंपना पड़ा है, जिससे लोगों में प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। 29 दिसंबर को मामला सामने आने के बाद से लोग लगातार डर में जी रहे हैं। कई परिवार नर्मदा का पानी भरना छोड़ चुके हैं। बोरिंग, टैंकर और आरओ का पानी ही अब विकल्प बन गया है। प्रशासन लोगों को पानी उबालकर और छानकर उपयोग करने की सलाह दे रहा है।

बोतलबंद पानी तक का इस्तेमाल बढ़ा

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई दुकानों पर चाय और नाश्ता बनाने तक में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। घरों में लोग बोरिंग के पानी को भी उबालकर पीने को मजबूर हैं। ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां भी बांटी जा रही हैं। डर के चलते इलाके में आरओ मशीनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कई घरों में आनन-फानन में आरओ लगवाए जा रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में आरओ की बिक्री कई गुना बढ़ गई है।

मजबूरी में लगाया आरओ

रहवासी राहुल कोरी बताते हैं कि उन्होंने करीब साढ़े दस हजार रुपए खर्च कर घर में आरओ लगवाया। उनका कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की मौतों ने पूरे इलाके को हिला दिया है। सरकार और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए वे कहते हैं कि अब अपनी सुरक्षा खुद करनी पड़ रही है।

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