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प्रधानमंत्री और RSS पर विवादित कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को सुप्रीम कोर्ट से भी तत्काल राहत नहीं, माफी मांगने के लिए एक दिन का समय

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Published On: 14 July 2025

इंदौर | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर आपत्तिजनक कार्टून बनाने के मामले में फंसे इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को सुप्रीम कोर्ट से भी तत्काल राहत नहीं मिली है। सोमवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की, लेकिन उसे मंजूरी देने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने उन्हें माफी मांगने के लिए मंगलवार तक का समय जरूर दिया है।

इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी 8 जुलाई को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह भड़काऊ है

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति धूलिया ने टिप्पणी की, “उनमें अभी भी कोई परिपक्वता नहीं है। यह वास्तव में भड़काऊ है।” कोर्ट ने विवादित कार्टून को “अशोभनीय” बताया और कहा कि प्रधानमंत्री और संघ जैसे संस्थानों को इस तरह चित्रित करना गंभीर मामला है। हेमंत मालवीय की ओर से वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने पक्ष रखते हुए कहा कि जिस पोस्ट को लेकर विवाद है, वह सोशल मीडिया से हटा लिया गया है। यह पोस्ट कोई आपराधिक कृत्य नहीं था, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा था। इस पर भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जवाब में कहा कि इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और यदि पोस्ट आपत्तिजनक है तो कार्रवाई जरूरी है।

क्या था विवाद?

3 महीने पहले मई में हेमंत मालवीय ने एक कार्टून सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसमें संघ की पोशाक पहने एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री के कार्टून के सामने झुकते हुए दिखाया गया था। पीएम मोदी को स्टेथोस्कोप और इंजेक्शन के साथ दिखाया गया था, जबकि उनके शॉर्ट्स नीचे खिसके हुए थे और उनका निचला हिस्सा नजर आ रहा था। इस पर अधिवक्ता विनय जोशी ने इंदौर के बिलावली थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

  • IPC की धारा 196 – समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने का आरोप
  • धारा 299, 302, 352, 353 – धार्मिक भावनाएं आहत करने और शांति भंग करने की धाराएं
  • IT एक्ट की धारा 67A – आपत्तिजनक सामग्री का प्रसारण

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

इंदौर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने अग्रिम जमानत खारिज करते हुए कहा था कि हेमंत मालवीय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है। उन्होंने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया और स्पष्ट रूप से सीमाएं लांघी हैं। कोर्ट ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की अनुमति दी थी।

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