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भागीरथपुरा के साथ कांग्रेस खड़ी, उमंग सिंघार ने नेताओं को रोके जाने पर जताया कड़ा विरोध; खुद मौके पर जाने का ऐलान

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Published On: 5 January 2026

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में फैले जल संकट और मौतों के बीच कांग्रेस नेताओं को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोके जाने का मामला अब सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि दुख की इस घड़ी में पीड़ितों से मिलने से रोकना निंदनीय और असंवेदनशील कदम है।

उमंग सिंघार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब लोग अपने अपनों को खो चुके हैं, तब जनप्रतिनिधियों का उनसे मिलना उनका नैतिक दायित्व है। ऐसे समय में नेताओं को रोका जाना यह दर्शाता है कि प्रशासन सच्चाई सामने आने से डर रहा है। उन्होंने इसे जनता की आवाज दबाने का प्रयास बताया।

खुद भागीरथपुरा पहुंचने का एलान

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी ऐलान किया कि वह स्वयं भागीरथपुरा जाकर वहां के नागरिकों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में वे पीड़ित परिवारों की बात सुनेंगे और जमीनी हालात का जायजा लेंगे। सिंघार के इस बयान के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी सक्रियता बढ़ गई है। उमंग सिंघार ने कहा कि इस कठिन समय में कांग्रेस पार्टी का हर कार्यकर्ता और हर नेता भागीरथपुरा के नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी न केवल पीड़ितों की आवाज बनेगी, बल्कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय कराने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

दूषित पानी से उपजा संकट बना सियासी मुद्दा

भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद यह मामला अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्ष लगातार प्रशासन और सरकार पर लापरवाही के आरोप लगा रहा है। वहीं, लोगों में भी यह भावना मजबूत हो रही है कि उनकी पीड़ा को अनसुना किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। ऐसे में विपक्षी नेताओं का इलाके में आना लोगों को उम्मीद की एक किरण जैसा लग रहा है। उमंग सिंघार का दौरा इस मामले में नया मोड़ ला सकता है।

नेता प्रतिपक्ष के बयान और दौरे के एलान के बाद साफ है कि आने वाले दिनों में भागीरथपुरा का मामला और ज्यादा गरमाने वाला है। कांग्रेस इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनाकर सड़क से सदन तक उठाने की तैयारी में है, जबकि प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

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