भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोग बीमार हुए और कई परिवारों के सदस्यों की मौत भी हुई। मौके पर जाकर प्रभावित लोगों से मिलने वाले नेताओं का कहना है कि यह स्थिति सरकार की लापरवाही का नतीजा है। पीड़ित परिवारों ने साफ पानी की व्यवस्था की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सरकार ने वादा किया था कि देश को स्मार्ट सिटी दी जाएंगी। लेकिन भागीरथपुरा और इंदौर में साफ पानी न मिलना इस मॉडल पर सवाल खड़ा करता है। नेता विपक्ष ने कहा कि यह नया “स्मार्ट सिटी मॉडल” लोगों के लिए मौत और भय लेकर आया है। साफ पानी और बुनियादी सुविधाओं के बिना शहर की तस्वीर पूरी नहीं हो सकती।
भागीरथपुरा में दूषित पानी
यह समस्या केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। देश के अन्य शहरों में भी नागरिकों को दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है। साफ पानी और हवा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे पूरा नहीं किया जा रहा है। नेता विपक्ष ने कहा कि सरकार को तुरंत जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और पीड़ितों को सही मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो हालात बने हैं, वे पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम हैं। साफ पानी की व्यवस्था अब प्राथमिकता होनी चाहिए।
BJP की ‘स्मार्ट सिटी’👇
⦿ न साफ पानी – न साफ हवा
⦿ न जिम्मेदारी – न जवाबदेही pic.twitter.com/z82DhKi5GX— MP Congress (@INCMP) January 17, 2026
जनता के साथ खड़ा विपक्ष
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज़ संसद और जनसमूहों तक पहुंचाने का काम करेंगे। नेता ने कहा कि जनता को सुरक्षित और साफ पानी देना सरकार की मूल जिम्मेदारी है, जिसे बिना विलंब पूरा करना अनिवार्य है। भागीरथपुरा और इंदौर में लोगों की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों और नेताओं का सुझाव है कि तुरंत पानी की शुद्धता की जांच कराए जाएं और संकटग्रस्त इलाकों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
