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भागीरथपुरा में दूषित जल का कहर: इलाके में नर्मदा-ड्रेनेज का काम तेज, आज हाईकोर्ट में सुनवाई

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Published On: 15 January 2026

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली त्रासदी ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। अब तक इस जहरीले पानी के कारण 23 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि तीन मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहे हैं। सैकड़ों लोग इलाज के बाद अस्पताल से लौट चुके हैं, लेकिन भय और आक्रोश अब भी इलाके में साफ नजर आ रहा है।

त्रासदी के बाद प्रशासन ने भागीरथपुरा में नर्मदा जल आपूर्ति और ड्रेनेज लाइन के काम में तेजी लाई है। इलाके में जगह-जगह सड़कें खोदी गई हैं और पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। हालांकि निर्माण कार्य के चलते रास्ते उबड़-खाबड़ हो गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार स्थायी समाधान निकलेगा और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।

अंदरूनी इलाकों में खुदाई

भागीरथपुरा टंकी के पास बने गार्डन और भागीरथपुरा चौकी के सामने वाली सड़क पर नर्मदा लाइन डालने के लिए जेसीबी से खुदाई की जा रही है। पाइप मौके पर रखे गए हैं और मजदूर लगातार काम में जुटे हैं। स्थानीय कर्मचारियों के मुताबिक यह काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

इलाके के अंदरूनी हिस्सों में भी ड्रेनेज और नर्मदा लाइन बिछाने का काम जारी है। चाय की दुकानों और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सामने सड़कें खोदी गई हैं। कई जगह भराव का काम अधूरा होने से कीचड़ फैल गया है। मुख्य रास्ते बंद होने के कारण लोग संकरी गलियों से आने-जाने को मजबूर हैं, जिससे दोपहिया चालकों और पैदल राहगीरों को काफी परेशानी हो रही है।

5 याचिकाओं पर सुनवाई

इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में गुरुवार, 15 जनवरी को दायर पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार के जवाब को असंवेदनशील बताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। अदालत ने कहा था कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है।

पेयजल मौलिक अधिकार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि स्वच्छ पेयजल केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के नागरिकों का मौलिक अधिकार है। जरूरत पड़ने पर दोषी अधिकारियों पर सिविल और आपराधिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है। साथ ही मुआवजे की राशि कम पाए जाने पर उसमें बढ़ोतरी के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। खास बात यह है कि पिछली सुनवाई के समय मौतों का आंकड़ा 18 था, जो अब बढ़कर 23 हो चुका है।

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