इंदौर | मध्य प्रदेश के इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था पर लगाम लगाने को लेकर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच एक बार फिर गंभीर सुनवाई करेगी। शहर के भीतर और बाहरी इलाकों में ट्रैफिक जाम, जर्जर सड़कों, ई-रिक्शा की मनमानी, अवैध पार्किंग और बायपास की बदहाल हालत को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं पर न्यायालय गहन विचार करेगा।
हाईकोर्ट ने नगर निगम मेयर पुष्यमित्र भार्गव को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है। न्यायालय ने उनसे अपेक्षा जताई है कि वे शहर की जमीनी हकीकत, ट्रैफिक से जुड़ी समस्याएं और उनके समाधान के व्यावहारिक सुझाव पेश करेंगे। आज की सुनवाई में भार्गव कोर्ट के समक्ष मौजूद रहेंगे और तथ्य आधारित पक्ष रखेंगे। उम्मीद है कि कोर्ट की यह सुनवाई शहर की दशा-दिशा बदलने की दिशा में अहम मोड़ साबित हो सकती है।
ट्रैफिक का हाल बेहाल
इंदौर की प्रमुख सड़कों और बायपास पर बनी गड्ढेदार स्थिति, अंधेरे में डूबी स्ट्रीट लाइट्स, ट्रैफिक पुलिस की चालानी कार्यवाही पर अधिक फोकस, अवैध बस स्टैंडों की भरमार और बेतरतीब ई-रिक्शा संचालन जैसे मुद्दे अब सीधे अदालत की नजर में हैं।
खासकर बायपास को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की भूमिका पर कोर्ट पहले ही नाराजगी जता चुका है। कई बार हलफनामा देकर मरम्मत के वादे किए गए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सड़कें टूटी पड़ी हैं, ब्रिजों पर जानलेवा गड्ढे हैं और सर्विस रोड की हालत दयनीय बनी हुई है।
न्यायमित्र से उम्मीदें
पुष्यमित्र भार्गव की न्यायमित्र के रूप में नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक पहलू नहीं, बल्कि कोर्ट का यह संदेश है कि अब राजनीतिक नेतृत्व को भी जवाबदेह बनना होगा। उनसे अपेक्षा है कि वे जनसुनवाई, निगम रिपोर्ट और विशेषज्ञों की मदद से कोर्ट के समक्ष ठोस समाधान पेश करें।
इस बीच कोर्ट द्वारा यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि संबंधित एजेंसियां लापरवाही बरतती हैं, तो कड़ी कार्रवाई से भी गुरेज नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट अब जनहित याचिकाओं को सिर्फ दस्तावेज नहीं, बल्कि सुनियोजित बदलाव का जरिया बना रही है।
