इंदौर (Indore News) की एबी रोड पर लंबे समय से अटकी यातायात सुधार योजना को आखिरकार नई दिशा मिल गई है। रविवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एलआईजी चौराहे से नौलखा चौराहे तक 5.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। इसके साथ ही बीते छह वर्षों से लटकी इस परियोजना पर असमंजस खत्म हो गया है।
मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की यातायात जरूरतों को देखते हुए एलिवेटेड कॉरिडोर के दायरे को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसकी उपयोगिता को लेकर जनप्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ अलग से चर्चा की जाए, ताकि निर्माण के बाद किसी तरह की व्यावहारिक दिक्कत सामने न आए।
2019 में मिली थी पहली स्वीकृति
एलआईजी से नौलखा के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर का विचार नया नहीं है। वर्ष 2019 में इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी और केंद्र सरकार ने इसके लिए करीब 350 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए थे। एक निजी कंपनी को टेंडर दिया गया, लेकिन डिजाइन में बार-बार बदलाव और तकनीकी अड़चनों के चलते काम शुरू नहीं हो सका। 2 साल पहले तत्कालीन सरकार के दौरान इस परियोजना का भूमिपूजन भी हुआ, लेकिन इसके बाद अचानक काम रोक दिया गया। इसके बाद इंदौर विकास प्राधिकरण ने एबी रोड पर छह फ्लाईओवर और एक ग्रेड सेपरेटर बनाने का विकल्प तैयार कराया। तीन प्रमुख चौराहों पर पहले चरण में काम शुरू करने की योजना बनी, मगर यह प्रस्ताव भी फाइलों में ही अटक गया।
कॉरिडोर पर जोर
इंदौर उत्थान समिति ने फ्लाईओवर के बजाय पूरे एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का सुझाव दिया था। समिति ने अन्य बड़े शहरों के मॉडल का अध्ययन कर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने प्रेजेंटेशन भी दिया। समिति का तर्क था कि आंशिक फ्लाईओवर की बजाय निरंतर कॉरिडोर से ट्रैफिक ज्यादा सुचारु रहेगा। समिति से जुड़े अजित नारंग के अनुसार, प्रस्तावित क्षेत्र के करीब 63 प्रतिशत हिस्से में ही फ्लाईओवर बन रहे थे। ऐसे में पूरे हिस्से में एलिवेटेड कॉरिडोर बनाकर चौराहों पर रोटरी और रैम्प उतारे जाएं तो सिग्नल पर रुकावट कम होगी और यातायात का दबाव नीचे की सड़क पर भी संतुलित रहेगा।
फैसले से बढ़ी उम्मीदें
बीआरटीएस हटने के बाद एबी रोड पर ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर जो असमंजस बना हुआ था, वह इस फैसले से काफी हद तक दूर होता दिख रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि तकनीकी समीक्षा और जनप्रतिनिधियों से चर्चा के बाद परियोजना जमीन पर कब उतरती है। इंदौरवासियों को उम्मीद है कि यह कॉरिडोर शहर की सबसे व्यस्त सड़क को नई रफ्तार देगा।
