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इंदौर में क्रिश्चियन कॉलेज की 400 करोड़ की जमीन सरकारी घोषित, कलेक्टर ने कब्जे के दिए आदेश

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Published On: 24 January 2026

इंदौर में क्रिश्चियन कॉलेज से जुड़ी करीब 400 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन को सरकारी घोषित कर दिया गया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने लीज शर्तों के उल्लंघन को आधार बनाते हुए यह अहम फैसला लिया है। साथ ही जूनी इंदौर के तहसीलदार को तीन दिनों के भीतर जमीन का कब्जा लेकर शासन के नाम दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर के आदेश के अनुसार, कब्जा लिए जाने के बाद इस भूमि का उपयोग जनहित और शासन के उद्देश्य से किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि इस बहुमूल्य जमीन पर लंबे समय से भूमाफिया की नजर थी। वहीं कॉलेज प्रबंधन भी परिसर की शेष भूमि को व्यावसायिक उपयोग में लाने की योजना बना रहा था। कार्यालय, दुकानें और अन्य व्यावसायिक निर्माण के लिए नक्शा मंजूरी की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद ही पूरे मामले की परतें खुलीं और जिला प्रशासन ने जांच तेज कर दी।

इंदौर में क्रिश्चियन कॉलेज

कॉलेज प्रबंधन ने कलेक्टर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कलेक्टर का पत्र केवल नोटिस है और अंतिम निर्णय के लिए प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। इसके बाद प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां याचिका खारिज कर दी गई। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि कलेक्टर कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं।

यह मामला तब गंभीर हुआ, जब कॉलेज प्रबंधन ने इंदौर कस्बे के खसरा नंबर 407/1669/3 की भूमि पर व्यावसायिक निर्माण के लिए नक्शा मंजूरी का आवेदन किया। कुल 68.303 हेक्टेयर जमीन में से केवल 1.702 हेक्टेयर पर कॉलेज संचालित है, जबकि शेष भूमि पर अन्य गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी। इस पर प्रशासन ने पूरे भू-भाग की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति की जांच शुरू की।

1887 में महिला अस्पताल

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन वर्ष 1887 में होलकर रियासत के दौरान महारानी भागीरथी बाई द्वारा कैनेडियन मिशन को महिला अस्पताल और स्कूल संचालन के उद्देश्य से दी गई थी। लीज की शर्तों में स्पष्ट था कि जब तक जमीन का उपयोग अस्पताल और स्कूल के लिए किया जाएगा, तभी तक यह मिशन के पास रहेगी। उपयोग बंद होने या उद्देश्य बदलने की स्थिति में शासन को जमीन वापस लेने का अधिकार सुरक्षित रखा गया था।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि जमीन पर महिला अस्पताल का संचालन नहीं हो रहा है और कॉलेज भी केवल सीमित क्षेत्र में कार्यरत है। इसके बावजूद शेष भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों की तैयारी की जा रही थी, जो लीज की शर्तों और मूल उद्देश्य के खिलाफ है। इसी आधार पर कलेक्टर ने न केवल नक्शा मंजूरी पर रोक लगाई, बल्कि जमीन शासन के अधीन लेने की प्रक्रिया भी शुरू की।

स्टे का विकल्प खत्म

सभी कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद 23 जनवरी को कलेक्टर कोर्ट से अंतिम आदेश पारित हुआ। अवकाश और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते कॉलेज प्रबंधन के पास अब किसी प्रकार का स्टे लेने का विकल्प भी नहीं बचा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा में जमीन का कब्जा लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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