इंदौर के होलकर विज्ञान महाविद्यालय से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद शैक्षणिक जगत में खलबली मच गई है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो में एक युवक कॉलेज के बाथरूम में नकल करता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति एबीवीपी का उपाध्यक्ष विकेंद्र सिंह है। वीडियो सामने आते ही कॉलेज और शिक्षा व्यवस्था दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवक परीक्षा के दौरान बाथरूम के भीतर मोबाइल या पर्चियों के जरिए उत्तर हासिल कर रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह वीडियो में यह दावा करता हुआ भी सुनाई देता है कि इस पूरे काम में कुछ शिक्षक उसकी मदद कर रहे हैं। यह दृश्य न केवल नियमों का उल्लंघन दिखाता है, बल्कि परीक्षा की पवित्रता पर सीधा हमला भी करता है।
इंदौर में नियमों की अनदेखी
वीडियो में युवक का आत्मविश्वास यह संकेत देता है कि उसे किसी कार्रवाई का डर नहीं है। नियम-कानून को खुलेआम ठेंगा दिखाने का यह अंदाज बताता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की ढील भी इसकी वजह हो सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर यह सब बिना रोक-टोक हो रहा है, तो निगरानी व्यवस्था आखिर किस हाल में है। इस घटना ने उन छात्रों के मन में गहरी निराशा पैदा कर दी है, जो ईमानदारी से पढ़ाई कर परीक्षा देते हैं। मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह संदेश बेहद गलत है कि नकल और रसूख के दम पर सब कुछ हासिल किया जा सकता है। इससे न केवल उनका मनोबल टूटता है, बल्कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित होती है।
सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल
यह मामला अब सिर्फ एक छात्र या एक संगठन से जुड़ा नहीं रह गया है। यदि वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पूरे परीक्षा तंत्र, कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच का दायरा केवल छात्र तक सीमित न रखकर, ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों और निगरानी व्यवस्था तक भी पहुंचना जरूरी है। मामले के सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन और संबंधित विश्वविद्यालय से तत्काल, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है। छात्रों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि दोषी चाहे छात्र हो या शिक्षक, सभी पर समान रूप से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। तभी शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रह सकेगा।
