रंगों के पर्व होली को देखते हुए इंदौर वनमंडल एक बार फिर प्राकृतिक हर्बल गुलाल तैयार कर रहा है। हर साल की तरह इस बार भी पलाश (टेसू) के फूलों से नारंगी रंग का गुलाल बनाया जा रहा है, लेकिन मौसम के मिजाज ने उत्पादन की रफ्तार पर असर डाला है। सर्दी का लंबा असर और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण पलाश के फूल इस बार देरी से खिले, जिससे गुलाल बनाने की प्रक्रिया भी तय समय से पीछे खिसक गई।
वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मदद से चोरल जंगल क्षेत्र से पलाश के फूल एकत्र किए। इन फूलों को संबंधित रेंज कार्यालयों में लाकर सावधानी से सुखाया गया। सूखने के बाद इन्हें पीसकर बारीक गुलाल तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से की जा रही है, ताकि रंग की गुणवत्ता और शुद्धता बनी रहे।
होली पर इंदौर
इंदौर वनमंडल के डीएफओ लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि इस वर्ष मौसम में नमी और तापमान में बदलाव के कारण पलाश के फूलों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम रही है। इससे गुलाल का उत्पादन थोड़ा घट सकता है। हालांकि विभाग का प्रयास है कि मांग को देखते हुए अधिकतम मात्रा में गुलाल तैयार किया जाए, ताकि लोगों को प्राकृतिक विकल्प आसानी से मिल सके।
1 मार्च से बिक्री शुरू
वन विभाग द्वारा तैयार किया गया यह हर्बल गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें किसी प्रकार के रासायनिक तत्वों का उपयोग नहीं किया जाता। इसका उद्देश्य लोगों को त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल रंग उपलब्ध कराना है। विभाग के मुताबिक यह गुलाल एक मार्च से शहर के विभिन्न वन विभाग केंद्रों और बिक्री काउंटरों पर आम लोगों के लिए उपलब्ध रहेगा।
विकल्प बना हर्बल गुलाल
पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक रंगों से त्वचा और आंखों को नुकसान की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे में प्राकृतिक गुलाल की मांग भी बढ़ी है। वन विभाग का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने का माध्यम भी बन रहा है। होली के मौके पर यदि लोग प्राकृतिक रंग अपनाते हैं तो यह स्वास्थ्य और प्रकृति दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
