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इंदौर की नलों से बहता जहर: वाटर ऑडिट ने उजागर की सबसे स्वच्छ शहर की सच्चाई, उमंग सिंघार का बड़ा हमला

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Published On: 8 January 2026

इंदौर में जल प्रदूषण से जुड़ा मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में आ गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने वाटर ऑडिट के निष्कर्ष सामने रखते हुए दावा किया कि भाजपा सरकार के स्वच्छता और विकास के दावे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। उन्होंने कहा कि जिस शहर को देश में बार-बार सबसे स्वच्छ घोषित किया गया, वहीं नलों से लोगों को पीने लायक पानी तक नहीं मिल रहा।

उमंग सिंघार ने बताया कि 6 जनवरी को भगीरथपुरा पहुंचने पर हालात बेहद भयावह नजर आए। स्थानीय लोगों और पत्रकारों के मुताबिक अब तक करीब 20 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित इलाके को पुलिस बैरिकेडिंग लगाकर सील जैसा कर दिया गया, ताकि सच्चाई बाहर न आए। कई परिवार डरे-सहमे दिखे और खुलकर बोलने से कतराते नजर आए।

इंदौर: वाटर ऑडिट से खुली परतें

7 जनवरी को किए गए वाटर ऑडिट को औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ज़मीनी सच्चाई की पड़ताल बताया गया। मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, बर्फानी धाम, कृष्णा बाग और कनाडिया जैसे इलाकों में नलों से आने वाले पानी की स्थिति देखी गई। ये वे क्षेत्र हैं, जहां शहर का गरीब और मेहनतकश तबका रहता है।

ऑडिट में सामने आया कि कई इलाकों में पानी से तेज बदबू आ रही है, रंग असामान्य है और कहीं-कहीं सीवेज की मिलावट साफ नजर आई। लोगों ने बताया कि इस पानी को पीने से उल्टी-दस्त और पेट की गंभीर समस्याएं हो रही हैं। कई महिलाएं रोते हुए अपनी पीड़ा बताती दिखीं।

इलाकेवार गंभीर लापरवाही

मदीना नगर में नियमित बिल भरने के बावजूद गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। खजराना में नर्मदा जल तक प्रदूषित मिला। भूरी टेकरी और कृष्णा बाग में गटर के पास से गुजरती पाइपलाइन खतरे की घंटी है। बर्फानी धाम और कनाडिया में भी हालात एक जैसे बदतर हैं, जहां प्रशासन की मौजूदगी नाम मात्र की है। उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि आठ बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब और 8 हजार करोड़ से ज्यादा का निगम बजट होने के बावजूद लोग साफ पानी को तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीवारों पर अवॉर्ड लगे हैं, लेकिन नालों में ज़हर बह रहा है।

सरकार से सीधी मांग

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूरे प्रदेश में वाटर ऑडिट कराने की मांग की। साथ ही नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से भी अपने-अपने क्षेत्रों में पानी की जांच कराने की अपील की। उन्होंने निगम अधिकारियों और महापौर पर एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक विपक्ष जनता की आवाज सड़क से सदन तक उठाता रहेगा।

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