मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इंदौर नगर निगम के पदों और कर्मचारियों की स्थिति पर विधानसभा में दिए गए उनके जवाब पर विपक्ष ने सवाल उठाए। मंत्री ने सफाई संरक्षक के 3,900 स्वीकृत पदों को पूरी तरह खाली बताते हुए कहा कि निगम में एक भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है, जबकि वास्तविकता में 1,200 से अधिक सफाई संरक्षक और 2,400 से ज्यादा विनियमित सफाई कर्मचारी नियमित रूप से सफाई का काम संभाल रहे हैं।
शहर के विधायक महेंद्र हार्डिया (बीजेपी) ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से नगर निगम में स्वीकृत पदों, कार्यरत कर्मचारियों और रिक्त पदों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कर्मचारियों की कमी के कारण एक ही अधिकारी को कई विभागों का प्रभार सौंपा गया है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
विजयवर्गीय ने जवाब में निगम की सीमा विस्तार का हवाला देते हुए कहा कि अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिए गए हैं, क्योंकि अमले की कमी है। उन्होंने यह भी वादा किया कि पर्याप्त स्टाफ भर्ती होने पर प्रभार वापस ले लिए जाएंगे। लेकिन उनके द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर विपक्ष और नगर निगम के अधिकारी सवाल उठा रहे हैं।
आंकड़ों में विरोधाभास
मंत्री के अनुसार निगम में कुल 6,312 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल 1,493 भरे हुए हैं और 4,819 रिक्त बताए गए हैं। खासकर सफाई संरक्षकों के 3,900 पद पूरी तरह खाली बताए गए।
वहीं निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, 1,200 से अधिक सफाई संरक्षक नियमित रूप से काम कर रहे हैं और 2,400 से ज्यादा विनियमित सफाई कर्मचारी शहर की सफाई व्यवस्था चला रहे हैं। मंत्री ने इन कर्मचारियों को निगम का आधिकारिक कर्मचारी मानने से इनकार किया है, जिससे सफाई कर्मचारियों में रोष और असंतोष बढ़ गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सफाई कर्मचारियों ने इस बयान को उनके अधिकारों के खिलाफ माना है। विपक्ष ने भी मंत्री पर डेटा में गलत जानकारी देने और कर्मचारियों की मेहनत को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। अब विधानसभा और नगर निगम स्तर पर इस विवाद को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज होने की संभावना है।
