मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 का आयोजन अब 2026 की प्रारंभिक परीक्षा के बाद ही संभव माना जा रहा है। आयोग ने 2026 की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा की तारीख 26 अप्रैल तय कर दी है, जिससे पहले मेंस परीक्षा कराना व्यावहारिक रूप से कठिन नजर आ रहा है। फिलहाल यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है और परीक्षा पर न्यायिक रोक लगी हुई है। संभावित रूप से 10 फरवरी को इस मामले की सुनवाई हो सकती है।
जानकारों के अनुसार, यदि 10 फरवरी को सुनवाई होती है, तो आयोग कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए राज्य सेवा मुख्य परीक्षा आयोजित करने की अनुमति मांगेगा। हालांकि, अनुमति मिलने के बावजूद अप्रैल के अंत या मई 2026 से पहले परीक्षा कराना आयोग के लिए बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि परीक्षा से जुड़ी तैयारियों में पर्याप्त समय लगता है।
MPPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा
राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 का आयोजन पहले 9 जून 2025 को प्रस्तावित था, लेकिन कोर्ट की रोक के चलते अब तक नई तारीख घोषित नहीं की जा सकी है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार, फरवरी में सुनवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, मार्च में स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (SET) आयोजित होना है, जिसमें करीब 1.46 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे। वहीं 26 अप्रैल को राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 प्रस्तावित है, जिसमें औसतन 2 लाख उम्मीदवार भाग लेंगे। इसके साथ ही मेंस परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा केंद्रों का निर्धारण और व्यवस्थाएं पूरी करने में कम से कम दो महीने का समय लग सकता है।
7 साल से देरी झेल रहे उम्मीदवार
राज्य सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी बीते कई वर्षों से लगातार देरी का सामना कर रहे हैं। पहले जहां चयन सूची एक वर्ष के भीतर जारी हो जाती थी, अब पूरी प्रक्रिया डेढ़ से दो वर्ष तक खिंच रही है। 2019 और 2023 की परीक्षाओं में भी याचिकाएं दायर हुई थीं, जिनके चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। लंबी सुनवाई के बाद आयोग को चयन सूची जारी करने की अनुमति मिल सकी।
पिछले वर्षों की चयन सूची में भी देरी
- राज्य सेवा 2020 की चयन सूची फरवरी 2023 में जारी हुई, जिसमें लगभग दो साल की देरी हुई और 260 पदों पर नियुक्ति की गई।
- राज्य सेवा 2021 की चयन सूची जून 2024 में आई, जिसमें डेढ़ साल की देरी हुई और 283 पद भरे गए।
- राज्य सेवा 2022 की चयन सूची फरवरी 2025 में जारी हुई, जो दो साल से अधिक देरी का उदाहरण रही, और इसमें 457 पद शामिल थे।
अभ्यर्थियों में बढ़ती चिंता
लगातार टलती परीक्षाओं से उम्मीदवारों में निराशा और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। करियर प्लानिंग, उम्र सीमा और तैयारी की निरंतरता जैसे मुद्दे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। अब सभी की नजरें फरवरी में होने वाली सुनवाई और उसके बाद आयोग के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।
