MP के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल में नेशनल कबड्डी प्लेयर रोशनी को एक्सपायरी दवा लगाए जाने का मामला अब पूरी तरह साबित हो गया है। पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तीन नर्सिंग ऑफिसरों पर कार्रवाई करते हुए एक को निलंबित कर दिया है। दो अन्य को भी दोषी मानते हुए उन पर विभागीय दंड लागू किया गया है। ये पूरा मामला तब सुर्खियों में आया, जब खिलाड़ी के पति सागर सिंह ने अस्पताल में पड़े एक्सपायर्ड दवा के लॉट और पत्नी को चढ़ाई गई दवा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया और अधिकारियों के सामने पेश किया। यही वीडियो इस केस में सबसे ठोस सबूत साबित हुआ।
अस्पताल के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने साफ कहा कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी चाहे वह कोई भी हो।
एक्सपायर्ड दवा चढ़ाने की पुष्टि
जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि रोशनी को लगातार दो दिन एक्सपायर्ड दवा चढ़ाई गई थी। यह वही दवा थी जिसका पूरा लॉट वार्ड 21 में पड़ा मिला। जब सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने दावा किया कि एक्सपायर्ड दवा लगाने से पहले ही हटा ली गई थी, तब सागर सिंह ने नया वीडियो जारी कर इन दावों को झूठा साबित कर दिया। समिति ने नर्सिंग ऑफिसर आसमां अंजूम, नैना गौतम और एंजलिना विल्फेड को दोषी माना है। आसमां अंजूम को तत्काल निलंबित किया गया है। नैना गौतम की वेतन वृद्धि रोकी गई है। एंजलिना विल्फेड के खिलाफ निंदा प्रस्ताव जारी किया गया है।
2 पर कार्रवाई
यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि अस्पताल की संपूर्ण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। एमवाय जैसा बड़ा संस्थान जहां प्रदेशभर के मरीज इलाज कराने आते हैं, वहां एक्सपायर्ड दवा मरीज तक पहुंच जाना प्रशासनिक निगरानी की बड़ी चूक मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे अस्पताल प्रबंधन स्टॉक मॉनिटरिंग, दवा वितरण सिस्टम और नर्सिंग स्टाफ की कार्यप्रणाली में क्या बदलाव करता है। फिलहाल, जांच रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि गलती हुई है और बड़ी हुई है।
