इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। मंच पर मौजूद प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, राष्ट्रीय सचिव उषा नायडू, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे और जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने इंदौर सहित पूरे प्रदेश की हालत को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। नेताओं ने इसे केवल राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन से जुड़ा संकट बताया।
प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों ने रोजगार, खेती और पर्यावरण तीनों को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी योजना को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। हवा और पानी के प्रदूषण को लेकर उन्होंने कहा कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यह सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का बड़ा संकट बन चुका है।
इंदौर में कांग्रेस का बड़ा हमला
कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि सुरक्षित पेयजल अब सुविधा नहीं, बल्कि नागरिकों का मौलिक अधिकार होना चाहिए। जल सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सख्त कानून लागू करने की मांग करते हुए कहा गया कि जब पानी ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो विकास के सारे दावे खोखले साबित होंगे। पत्रकार वार्ता में 11 जनवरी को बड़े गणपति से राजबाड़ा तक निकलने वाली न्याय यात्रा में शामिल होने की अपील की गई। नेताओं ने कहा कि यह यात्रा किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि इंदौर की जनता के हक और जवाबदेही तय कराने के लिए है।
आज इंदौर में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी श्री हरीश चौधरी जी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी एवं पूर्व मंत्री श्री सज्जन सिंह वर्मा जी ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया. https://t.co/N9Tbwhd78z
— MP Congress (@INCMP) January 9, 2026
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर के विकास पर बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि वर्षों में लगभग एक लाख करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद शहरवासियों को साफ पानी तक नसीब नहीं हो रहा। नलों से आ रहा दूषित पानी जनता को बीमार कर रहा है, और नगर निगम की लापरवाही ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
भागीरथपुरा मामला
कांग्रेस ने भागीरथपुरा घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि इसकी निगरानी रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश से कराई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर सख्त धाराओं में मामला दर्ज करने तथा मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग रखी गई। नेताओं ने आरोप लगाया कि आम नागरिकों पर छोटे नियमों में चालान हो जाते हैं, लेकिन ज़हरीला पानी पिलाने वालों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।
