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जबलपुर में 100 साल की संस्था, CM देवेंद्र फडणवीस का पुराना रिश्ता और मराठी भाषा को लेकर चिंता

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Published On: 28 December 2025

महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के शताब्दी समारोह ने रविवार को जबलपुर को खास बना दिया। सुबह करीब 11 बजे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस डुमना एयरपोर्ट पहुंचे। यहां लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, जबलपुर सांसद आशीष दुबे, विधायक नीरज सिंह सहित भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। एयरपोर्ट पर स्वागत के बाद मुख्यमंत्री सीधे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए।

सुबह 11.30 बजे मुख्यमंत्री फडणवीस मानस भवन पहुंचे, जहां महाराष्ट्र शिक्षण मंडल का शताब्दी समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में शिक्षा जगत से जुड़े लोग, विद्यार्थी, पूर्व छात्र और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। समारोह का माहौल उत्सवपूर्ण रहा और संस्था के सौ साल के सफर को याद किया गया।

पूरे प्रदेश के लिए गर्व

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र शिक्षण मंडल जबलपुर की पहचान सिर्फ एक संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सौ वर्ष पूरे करना केवल एक संस्था की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण है। उनका विश्वास है कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में भी शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा देगा।

कांग्रेस के आरोपों पर तीखा जवाब

कांग्रेस द्वारा संस्थाओं को खत्म करने के लगाए जा रहे आरोपों पर मुख्यमंत्री ने दो टूक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसी बातें कर रहे हैं, उन्हें अपनी ही पार्टी में कोई महत्व नहीं देता, तो मैं उन्हें क्यों तवज्जो दूं। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि उनका जबलपुर से पुराना रिश्ता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 से वे लगातार जबलपुर आते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 100 साल पहले महाराष्ट्र से आए लोगों ने यहां महाराष्ट्र शिक्षण मंडल की नींव रखी थी, जो आज एक बड़े शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है।

भाषाओं की विविधता हमारी ताकत

मुख्यमंत्री फडणवीस ने भाषा के मुद्दे पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सभी भाषाओं में बसती है, इसलिए किसी भी भाषा को खत्म नहीं होने देना चाहिए। हिंदी और अंग्रेजी का विस्तार समय की जरूरत है, लेकिन उन्हें चिंता है कि मराठी भाषा पीछे छूट रही है। उन्होंने महाराष्ट्र शिक्षण मंडल से मराठी भाषा को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी का उदाहरण देते हुए कहा कि शिवाजी ने स्वराज्य के साथ-साथ स्वभाषा को भी महत्व दिया था। मराठी शब्दों और भाषा को सशक्त करने के उनके प्रयास आज भी प्रेरणा देते हैं।

एआई में भारत का भविष्य उज्ज्वल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में एआई का भविष्य बेहद मजबूत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख सत्य नडेला मुंबई आए थे और उन्होंने भारत में तेजी से बढ़ते एआई डेवलपर समुदाय की सराहना की थी। फडणवीस ने दावा किया कि वर्ष 2030 तक दुनिया की सबसे बड़ी एआई डेवलपर कम्युनिटी भारत की होगी।

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