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गणतंत्र दिवस पर जबलपुर केंद्रीय जेल से 9 आजीवन कारावास के कैदी होंगे रिहा, देखें सूची

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Published On: 25 January 2026

गणतंत्र दिवस के अवसर पर जबलपुर केंद्रीय जेल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 कैदियों को रिहा किया जाएगा। इन कैदियों को उनके अनुशासित आचरण, सुधारात्मक गतिविधियों में सहभागिता और निर्धारित सजा अवधि पूरी करने के आधार पर मुक्ति दी जा रही है। यह फैसला शासन की ओर से कैदियों के पुनर्वास और समाज में पुनः समावेश की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

जेल उप अधीक्षक मदन कमलेश के अनुसार, रिहा किए जाने वाले कैदियों में जबलपुर जिले के 2, कटनी जिले के 4, जबकि डिंडोरी, सिवनी और मंडला जिले के 1-1 कैदी शामिल हैं। सभी कैदियों ने आजीवन कारावास के दौरान न्यूनतम 14.5 वर्ष की वास्तविक सजा और माफी सहित कुल 20 वर्ष की अवधि पूर्ण कर ली है, जो रिहाई के लिए तय मानकों के अनुरूप है।

जबलपुर केंद्रीय जेल

इन कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया जिला चयन समिति की अनुशंसा के बाद पूरी की गई है। इस समिति में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जेल अधीक्षक शामिल होते हैं, जो कैदियों के व्यवहार, सुधारात्मक प्रगति और सामाजिक पुनर्वास की संभावनाओं का आकलन करते हैं। समिति की सिफारिश के पश्चात शासन ने अंतिम स्वीकृति प्रदान की, जिसके बाद रिहाई का निर्णय लागू किया गया।

जेल प्रशासन ने बताया कि रिहा किए जा रहे कैदियों को सजा अवधि के दौरान विभिन्न कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़े प्रशिक्षण दिए गए हैं। इनमें हस्तशिल्प, कारीगरी, तकनीकी कार्य और अन्य रोजगारोन्मुखी गतिविधियां शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैदी रिहाई के बाद समाज में सम्मानजनक, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार जीवन जी सकें।

बढ़ाई गई रिहाई की संख्या

जेल अधीक्षक के अनुसार, पहले कैदियों की रिहाई केवल 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर ही की जाती थी, लेकिन अब इस परंपरा का विस्तार कर वर्ष में पांच अवसरों तक कर दिया गया है। इनमें अंबेडकर जयंती और जनजातीय गौरव दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिवस भी शामिल किए गए हैं। इससे अधिक संख्या में सुधारित कैदियों को समाज में लौटने का अवसर मिल सकेगा।

बता दें कि पूरे राज्य से इस साल गणतंत्र दिवस पर 87 कैदियों को रिहा किया जाएगा। वहीं, जेल प्रशासन का मानना है कि इन सभी कैदियों का आचरण जेल में अत्यंत सराहनीय रहा है। अधिकारियों को विश्वास है कि रिहाई के बाद वे समाज में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे और अपने अनुभवों से दूसरों को भी अपराध से दूर रहने की प्रेरणा देंगे। यह कदम सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और पुनर्वास की सोच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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