भारतीय रेलवे के लिए साल 2025 भी राहत भरा साबित नहीं हुआ। जबलपुर रेल मंडल में ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं लगातार सामने आईं। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अकेले जबलपुर में 25 बार ट्रेनों को निशाना बनाया गया, जबकि पिछले साल यह संख्या 15 थी। बढ़ती घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे सुरक्षा बल की जांच में चौंकाने वाली बात सामने आई। ज्यादातर मामलों में पत्थर फेंकने वाले न तो संगठित अपराधी थे और न ही किसी बड़ी साजिश का हिस्सा। अधिकतर घटनाएं या तो बच्चों की शरारत थीं या फिर शराब के नशे में धुत लोगों की हरकत। यही लापरवाही यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकती है।
स्थिति बिगड़ती देख आरपीएफ को विशेष निगरानी अभियान शुरू करना पड़ा। इसके तहत रेलवे ट्रैक के आसपास बेवजह घूमने वालों, शराब पीकर बैठने वालों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा कर्मियों की गश्त बढ़ाई गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
सतपुला और शोभापुर बने खतरे के इलाके
जबलपुर से कटनी की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए सतपुला और शोभापुर रेलवे ब्रिज सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाके बन चुके हैं। शोभापुर फाटक के पास स्थित शराब दुकान के पीछे अक्सर शराबी जमा हो जाते हैं, जो गुजरती ट्रेनों पर बोतल या पत्थर फेंक देते हैं। वहीं सतपुला पुल के पास खुले मैदान में क्रिकेट, जुआ और अन्य गतिविधियां चलती रहती हैं, जिससे ट्रेनों पर पथराव की आशंका बनी रहती है।
शराब दुकान पर उठे सवाल
आरपीएफ ने इन घटनाओं की जड़ में शराब दुकान को बड़ी वजह बताया है। पोस्ट प्रभारी राजीव खरब का कहना है कि यदि रेलवे ट्रैक के पास से शराब दुकान हटा दी जाए, तो पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी आ सकती है। इस संबंध में कलेक्टर, एसपी और आबकारी आयुक्त को पत्र भी भेजा गया है।
साल 2025 में कई घटनाएं यात्रियों के लिए डर का कारण बनीं। 24 दिसंबर को महाकौशल एक्सप्रेस के जनरल कोच पर शोभापुर फाटक के पास पथराव हुआ। 11 नवंबर को गोंडवाना एक्सप्रेस के एसी कोच की खिड़की टूट गई। एक अन्य मामले में ट्रेन के इंजन पर पत्थर लगा, जिसमें बाद में पता चला कि बच्चे खेल-खेल में यह हरकत कर रहे थे। 9 दिसंबर को एलटीटी-बनारस एक्सप्रेस के स्लीपर कोच को भी नुकसान पहुंचा।
