इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद पूरे मध्यप्रदेश में पेयजल की शुद्धता को लेकर जांच और सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी कड़ी में जबलपुर में भी पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। हालांकि, यहां मामला सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सियासी बहस का रूप ले चुका है।
अलग-अलग हेल्पलाइन
दूषित पानी की शिकायतों को लेकर जबलपुर नगर निगम और कांग्रेस ने अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए हैं। नगर निगम का दावा है कि जल सुनवाई और हेल्पलाइन पर बहुत कम शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उनकी हेल्पलाइन पर बड़ी संख्या में लोग गंदे पानी की शिकायतें कर रहे हैं। इस टकराव को लोग अब ‘हेल्पलाइन पॉलिटिक्स’ के तौर पर देख रहे हैं।
नालों में डूबी पाइपलाइन
राजनीतिक दावों के बीच जमीनी सच्चाई यह है कि शहर के कई इलाकों में आज भी पानी की पाइपलाइनें नालों के भीतर से गुजर रही हैं। बारिश या सीवेज ओवरफ्लो के दौरान इन पाइपलाइनों में गंदा पानी मिलने का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि कई क्षेत्रों में नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा का आरोप है कि इंदौर जैसी गंभीर घटना के बाद भी जबलपुर नगर निगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनका कहना है कि कई वार्डों में लोग मजबूरी में गंदा पानी पी रहे हैं, जबकि निगम के जिम्मेदार शिकायतें न मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इससे जनता का भरोसा धीरे-धीरे निगम से उठता जा रहा है।
गंदा पानी पीने को मजबूर
नेपियर टाउन और रसल चौक क्षेत्र के सीनियर सिटीजन राजेंद्र कुमार ने बताया कि उनके घर पिछले एक साल से नल में गंदा पानी आ रहा है। कई बार नगर निगम में शिकायत की गई, निजी स्तर पर पाइपलाइन की जांच भी करवाई गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। मजबूरी में उन्हें पीने का पानी बाहर से खरीदना पड़ रहा है।
कांग्रेस नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने राजेंद्र कुमार के घर पहुंचकर H2S टेस्ट किट से पानी की जांच करवाई। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं को साधारण केमिकल बोतलें दी गई हैं, जिनमें पानी भरने के बाद कुछ दिनों में उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लग जाता है।
महापौर की प्रतिक्रिया
महापौर जगत बहादुर अन्नू ने कहा कि कांग्रेस द्वारा हेल्पलाइन जारी करना सकारात्मक पहल है, लेकिन शिकायतों को विधिवत तरीके से दर्ज कराकर अधिकृत लैब में जांच कराना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ राजनीति के लिए गंदे पानी का मुद्दा उठाना उचित नहीं है, बल्कि समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास होने चाहिए।
