हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की रहस्यमय मौतों को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार और जबलपुर जिला प्रशासन से ताजा स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही घोड़े के मालिक सचिन तिवारी को शपथ पत्र देकर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि अभी कितने घोड़े जिंदा हैं और उनकी शारीरिक व मानसिक स्थिति क्या है।
मुख्य न्यायाधीश संजेव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी पूछा कि घोड़ों के स्वास्थ्य सुधार और देखभाल के लिए फिलहाल क्या इंतज़ाम किए जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि “यह सिर्फ जानवरों की नहीं, मानवीय संवेदना की भी बात है। यदि लापरवाही साबित हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है।”
19 घोड़ों की मौत की पुष्टि
सरकार की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 57 घोड़ों में से 19 की मौत हो चुकी है। बाकी घोड़ों की देखरेख वेटनरी कॉलेज की टीम कर रही है, लेकिन याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि मौतों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। याचिकाकर्ता की ओर से दायर रि-ज्वाइंडर में कहा गया है कि पिछले महीने कुछ और घोड़े मारे गए, जिनकी जानकारी प्रशासन छिपा रहा है।
कोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताई और अगली सुनवाई 3 दिसंबर को तय की है। तब तक सभी संबंधित विभागों को घोड़ों की स्वास्थ्य रिपोर्ट, भोजन व्यवस्था और उपचार की जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।
रेस और सट्टे से जुड़ा बड़ा खुलासा
इस मामले की जड़ में एक बड़ा खुलासा भी सामने आया है। याचिकाकर्ता सिमरन इस्सर, जो जबलपुर की पशु प्रेमी हैं, ने बताया कि घोड़ों का इस्तेमाल हैदराबाद रेस क्लब में अवैध सट्टेबाजी के लिए किया जा रहा था। क्लब के संचालक सुरेश पाल ने “हॉर्स पावर लीग” के नाम से रेस आयोजित की थी, जिसे फिलिपींस में “ट्रैपंग ऐप” के जरिए लाइव स्ट्रीम किया जाता था। बाद में फिलिपींस सरकार की शिकायत पर भारत में यह रैकेट पकड़ा गया और क्लब बंद कर दिया गया।
बताया गया कि सुरेश पाल के पास लगभग 150 घोड़े थे, जिनमें से भोजन और देखभाल के अभाव में करीब 90 की मौत हो गई। बाकी घोड़ों को साक्ष्य छिपाने के लिए जबलपुर के पनागर इलाके के रैपुरा फार्महाउस में लाया गया, जहां स्थिति और बिगड़ गई।
