जबलपुर जिले में अवैध रेत खनन और चोरी की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की है। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बीते तीन दिनों में जिले के कई इलाकों में सघन अभियान चलाया। इस दौरान नदियों के किनारे और आसपास के क्षेत्रों में अवैध रूप से जमा की गई रेत पर सीधी कार्रवाई की गई।
माइनिंग अधिकारी अशोक राय के मुताबिक, यह अभियान मझौली, सिहोरा, पाटन और जबलपुर शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया गया। कार्रवाई के दौरान टीम को अलग-अलग स्थानों पर नदियों से अवैध रूप से निकाली गई रेत का बड़ा भंडारण मिला। कई जगहों पर रेत को चोरी-छिपे जमा कर रखा गया था, ताकि बाद में उसे बेचकर मुनाफा कमाया जा सके।
जबलपुर में अवैध रेत खनन
प्रशासन ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए अवैध रूप से जमा रेत को नदियों में वापस डलवाया। जिन स्थानों पर रेत को नदी में डालना संभव नहीं था, वहां उसे सड़क किनारे फैलाकर उसमें मिट्टी मिलाकर नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि रेत दोबारा निर्माण कार्य या अवैध बिक्री में उपयोग न हो सके।
300 हाईवा रेत की हुई नष्ट
प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 300 हाईवा, यानी लगभग 4 हजार क्यूबिक मीटर अवैध रेत को नष्ट किया जा चुका है। यह रेत ज्यादातर लावारिस हालत में पाई गई थी, जहां किसी व्यक्ति या ठेकेदार की सीधी पहचान नहीं हो सकी। ऐसे मामलों में नियमों के तहत रेत को जब्त करने के बजाय मौके पर ही नष्ट करने की कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जहां-जहां अवैध रेत भंडारण करने वालों की पहचान हो सकेगी, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि जिले में अवैध रेत खनन और चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अभियान रहेगा लगातार जारी
प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल एक बार की कार्रवाई नहीं है। आने वाले दिनों में भी इसी तरह की सघन जांच और दबिश जारी रहेगी। अवैध खनन करने वालों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और इस कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
