मंगलवार को जबलपुर से शहपुरा की ओर जाने वाले मार्ग पर जो नजारा दिखा, वह किसी भी जिम्मेदार तंत्र के लिए चिंता का विषय है। एक छोटे पिकअप वाहन में क्षमता से कई गुना अधिक लोग सवार थे। महिलाएं, बच्चे और पुरुष एक-दूसरे के ऊपर बैठे हुए थे, मानो सामान की तरह उन्हें ठूंस दिया गया हो। हैरानी की बात यह रही कि वाहन तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ता रहा और किसी ने समय रहते रोकने की कोशिश नहीं की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिकअप की रफ्तार करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी। इतने लोगों को लेकर इस गति से वाहन चलना सीधे तौर पर हादसे को न्योता देने जैसा था। संतुलन बिगड़ने या अचानक ब्रेक लगने की स्थिति में दर्जनों जानें खतरे में पड़ सकती थीं। बावजूद इसके, चालक ने न तो रफ्तार कम की और न ही यात्रियों की सुरक्षा की कोई परवाह की।
जबलपुर में बेधड़क गुजरता वाहन
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह ओवरलोड पिकअप जबलपुर शहर से निकलकर शहपुरा तक कई थानों और ट्रैफिक पुलिस प्वाइंट्स को पार करता रहा। रास्ते में किसी भी चेकिंग प्वाइंट पर इसे नहीं रोका गया। इससे सवाल उठता है कि आखिर निगरानी व्यवस्था कहां चूक गई और ऐसी गंभीर लापरवाही कैसे नजरअंदाज हो गई। इन दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया हुआ है। दृश्यता कम होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे मौसम में तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहन चलाना न सिर्फ सवारियों के लिए, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि थोड़ी सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती थी।
वीडियो ने खोली पोल
इस पूरे मामले का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही जिम्मेदार अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ। इसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की। एएसपी अंजना तिवारी ने कहा कि एक छोटे वाहन में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बैठाकर ले जाना ट्रैफिक नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने माना कि यह बेहद खतरनाक स्थिति थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी थाना प्रभारियों और ट्रैफिक स्टाफ को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं।
