जबलपुर | मध्य प्रदेश के जबलपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के पहले वर्ष के छात्र शिवांश गुप्ता की मौत अब गंभीर सवालों के घेरे में है। 5 जून को कॉलेज हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने से उसकी जान गई थी, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी न तो पुलिस जांच किसी ठोस नतीजे पर पहुंची और न ही परिवार को संतोषजनक जवाब मिल सका। अब इस प्रकरण में केंद्रीय गृह मंत्रालय और लोक शिकायत विभाग ने हस्तक्षेप किया है, जिससे मामले में सीबीआई जांच की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
रीवा निवासी 21 वर्षीय शिवांश ने नीट में शानदार प्रदर्शन कर जबलपुर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। वह कॉलेज के गढ़ा थाना क्षेत्र स्थित हॉस्टल में रह रहा था। परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत से कुछ दिन पहले ही उसने नई बाइक खरीदी थी, जिससे कुछ सीनियर छात्र नाराज हो गए। इसके बाद उससे रैगिंग और मारपीट की गई। मां से हुई बातचीत में शिवांश ने खुद यह सब बताया था।
व्यवहार सामान्य नहीं
हॉस्टल के बाहर चाय की दुकान चलाने वाले शख्स ने भी माना कि शिवांश पिछले कुछ दिनों से तनाव में था। घटना के दिन भी उसका व्यवहार सामान्य नहीं लग रहा था। पुलिस ने शुरुआती जांच में आत्महत्या की बात कही, लेकिन मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। गिरने वाली जगह पर खून के निशान भी नहीं थे और शरीर पर गहरी चोटों का अभाव था, जिससे शक और गहरा गया।
अब मानव अधिकार और अपराध नियंत्रण संगठन के अध्यक्ष डॉ. अजय वाधवानी ने इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया है। उनका कहना है कि जबलपुर पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और जानबूझकर जांच को एक लड़की से जोड़ रही है, जबकि परिजनों का कहना है कि दोनों के बीच सिर्फ दोस्ती थी।
राज्य सरकार से मांगा जवाब
शिवांश के पिता संतोष गुप्ता का कहना है कि पुलिस ने अब तक न तो कॉल डिटेल साझा की और न ही हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज दिखाए। मोबाइल से भेजे गए कुछ संदिग्ध मैसेजों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनके बारे में परिजनों का दावा है कि वह मैसेज शिवांश ने नहीं भेजे। अब गृह मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यदि सरकार सहमत होती है, तो सीबीआई जांच का रास्ता साफ हो सकता है। परिजन और सामाजिक संगठन अब यही उम्मीद कर रहे हैं कि किसी तरह से शिवांश को न्याय मिले और असल सच्चाई सबके सामने आए।
