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सिहोरा आंदोलन: आमरण सत्याग्रह से उग्र विरोध तक, जिला मांग पर बढ़ी तनातनी

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Published On: 24 December 2025

जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र में जिला बनाने की मांग पिछले 27 वर्षों से चली आ रही है। इस मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से आमरण सत्याग्रह जारी है। आंदोलन के चलते सिहोरा क्षेत्र चार दिन तक बंद रहा। आंदोलनकारियों में से एक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्व प्रचारक प्रमोद साहू, लगातार अन्न त्याग के कारण आईसीयू में भर्ती हुए। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने 13 दिसंबर को प्रमोद साहू से बात की थी और 16 दिसंबर को मुख्यमंत्री से बातचीत कराने का भरोसा दिलाया। इसके बाद प्रमोद साहू ने जल ग्रहण करना शुरू किया लेकिन अन्न त्याग जारी रखा। पहले तय मंगलवार को मुख्यमंत्री से बातचीत नहीं हो सकी क्योंकि डिप्टी सीएम के करीबी का निधन हो गया।

रविवार को क्षेत्रीय भाजपा विधायक संतोष वरकड़े ने आंदोलनकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने का समय तय हो गया है। करीब 50 आंदोलनकारी मंच पर मौजूद थे और 10 निजी गाड़ियां तैयार कर ली गईं। लेकिन सोमवार को शाम को विधायक ने कॉल करके बताया कि मुख्यमंत्री से समय नहीं ले पाए। इस घटना से आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी दी।

विधायक के नंबर स्विच ऑफ

मंगलवार की सुबह से उनके दोनों नंबर स्विच ऑफ दिख रहे हैं। इससे आंदोलनकारियों में और असंतोष व्याप्त है। लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने कहा कि जनाक्रोश विस्फोट की कगार पर है। आंदोलनकारियों ने पुतला दहन और सड़क जाम की योजना बनाई है। समिति ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले किए गए वादे पूरे नहीं किए गए और आमरण सत्याग्रह जैसे संवेदनशील आंदोलन को झूठे आश्वासन देकर तुड़वाना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

समिति ने घोषणा की कि 25 दिसंबर को सिहोरा नगर और सभी ग्राम पंचायतों में मुख्यमंत्री के कुल 101 पुतले जलाए जाएंगे। वहीं, 27 दिसंबर को सड़क जाम कर जिला बनाने की मांग को लेकर उग्र विरोध किया जाएगा।

घर-घर पुतला दहन का आह्वान

समिति ने नागरिकों से अपील की कि यह लड़ाई किसी संगठन या व्यक्ति की नहीं, बल्कि सिहोरा के हर नागरिक के स्वाभिमान की लड़ाई है। इसलिए प्रत्येक नागरिक अपने घर के बाहर मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश सरकार का प्रतीकात्मक पुतला दहन करें। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि अब भी सरकार जिला सिहोरा की मांग पर ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन और भी उग्र होगा। सिहोरा अब चुप नहीं बैठेगा और यह संघर्ष आर-पार का है। वहीं, प्रमोद साहू 17 दिनों से अन्न ग्रहण नहीं कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है।

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