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उज्जैन में 1.85 करोड़ की साझेदारी ठगी का खुलासा, साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े तार

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Published On: 15 January 2026

उज्जैन के नीलगंगा थाना क्षेत्र में करीब 1 करोड़ 85 लाख रुपए की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। अंबर कॉलोनी निवासी फरियादी विजया हारेल की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। मामला एक व्यावसायिक साझेदारी से जुड़ा है, जिसमें निवेश की गई भारी रकम कथित रूप से हड़प ली गई।

फरियादी विजया हारेल ने पुलिस को बताया कि उन्होंने सिंगरौली में ‘मैक रेकॉन’ नाम की कंपनी संजीव सिंह और निशिकांत मिश्रा के साथ मिलकर शुरू की थी। कंपनी का काम पुरानी भारी मशीनों को नवीनीकरण और मरम्मत के बाद नए रूप में तैयार कर निर्यात या दोबारा बिक्री करना था। इस कारोबार में विजया हारेल ने अलग-अलग चरणों में कुल 1 करोड़ 85 लाख रुपए का निवेश किया था।

उज्जैन में ठगी

शिकायत के मुताबिक, साझेदारी के कुछ समय बाद ही दोनों अन्य भागीदारों की नीयत बदल गई। आरोप है कि संजीव सिंह और निशिकांत मिश्रा ने कंपनी के काम में रकम लगाने के बजाय निवेश की राशि अपने व्यक्तिगत खातों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर ली। जब फरियादी ने हिसाब-किताब मांगा तो टालमटोल शुरू हो गई, जिसके बाद धोखाधड़ी का संदेह गहराया।

साइबर फ्रॉड के लिंक

मामले की जांच के दौरान नीलगंगा पुलिस को कई अहम साक्ष्य हाथ लगे हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों की पड़ताल में यह सामने आया है कि उनमें देश के अलग-अलग राज्यों से संदिग्ध लेन-देन हुआ है। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने बताया कि निशिकांत मिश्रा के खिलाफ हरियाणा में भी साइबर अपराध से संबंधित केस दर्ज हैं। इसी सिलसिले में हरियाणा पुलिस ने निशिकांत मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, दूसरे आरोपी संजीव सिंह की तलाश नीलगंगा पुलिस कर रही है और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

खुलासों की संभावना

नीलगंगा थाना पुलिस का कहना है कि जिस तरह से आरोपियों के खातों में विभिन्न राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की रकम आने के सबूत मिले हैं, उससे यह मामला सिर्फ साझेदारी ठगी तक सीमित नहीं लगता। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य राज्यों से भी इनके खिलाफ नए प्रकरण सामने आ सकते हैं।

पुलिस पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के बाद मामले में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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