उज्जैन में 14 से 18 जनवरी तक चल रहे श्री महाकाल महोत्सव का चौथा दिन शनिवार को विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ‘कला यात्रा’ के आयोजन के साथ शुरू हुआ। इस दिन की यात्रा बुधवारिया क्षेत्र से आरंभ होकर नई सड़क, सतीगेट और गोपाल मंदिर मार्ग से होते हुए महालोक में समाप्त हुई। इस दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से महोत्सव में चार चांद लगा दिए।
कला यात्रा के दौरान योगेश मालवीय और उनके मलखंब दल ने पारंपरिक मलखंब का प्रदर्शन किया। दर्शक बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने इस प्रस्तुति को बेहद उत्साहपूर्वक देखा। इस प्रकार की गतिविधियों ने महालोक में कला और भक्ति का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत किया।
उज्जैन में महाकाल महोत्सव
महोत्सव के मंच पर विभिन्न जनजातीय लोकनृत्यों की झलक प्रस्तुत की गई। हरदा के मंशाराम और उनके दल ने कोरकू जनजातीय ‘गदली नृत्य’ दिखाया। खंडवा की अनुजा जोशी ने ‘गणगौर नृत्य’, सागर के लीलाधर रैकवार ने ‘ढिमरियाई नृत्य’ और बड़ौदा के विजय भाई राठवा ने ‘राठ नृत्य’ प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने महोत्सव को सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध किया।
रामधुन और भक्ति संगीत की शाम
शाम को महालोक के प्रांगण में सुगम संगीत और बैंड रामधुन की विशेष प्रस्तुतियां हुईं। इंदौर के श्रेयश शुक्ला और उनके बैंड ने भक्ति संगीत से माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके अलावा मुंबई के विपिन अनेजा और उनके बैंड ने रामधुन प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों को उप प्रशासक सिम्मी यादव ने सम्मानित किया। इस अवसर पर ज्योतिर्लिंग भगवान भीमाशंकर और भगवान नागेश्वर के पुजारी परिवार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आयोजकों और दर्शकों ने महोत्सव की भव्यता और कला के प्रति उत्साह की सराहना की।
भक्ति और लोकसंस्कृति का संगम
महाकाल महोत्सव ने चौथे दिन कला, भक्ति और लोकसंस्कृति का ऐसा संगम प्रस्तुत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। लोकनृत्यों, मलखंब और भक्ति संगीत ने महालोक के वातावरण को भक्तिपूर्ण और उत्सवमय बना दिया।
