उज्जैन एक बार फिर सांस्कृतिक उल्लास और भक्ति के रंग में रंगने जा रहा है। 14 से 18 जनवरी तक शहर में महाकाल महोत्सव का आयोजन होगा, जिसमें लोककलाओं से लेकर शास्त्रीय संगीत और आधुनिक प्रस्तुतियों तक का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। हर दिन शाम 7 बजे से कार्यक्रमों की शुरुआत होगी और महाकाल नगरी की फिजा संगीत व नृत्य से सराबोर हो जाएगी। महोत्सव का पहला दिन यानी 14 जनवरी पूरी तरह लोकसंस्कृति को समर्पित रहेगा। जनजातीय समाज की रंगीन परंपराएं मंच पर उतरेंगी।
गोंड समाज का सैला नृत्य, बैगा समुदाय का परधौनी नृत्य और भील समाज का भगोरिया नृत्य दर्शकों को मध्यप्रदेश की जड़ों से जोड़ देगा। दिन में कला यात्रा के जरिए शहर की सड़कों पर लोककलाओं की झलक देखने को मिलेगी, जो महोत्सव का माहौल पहले ही दिन जीवंत बना देगी।
सितारों से सजेगा मंच
महोत्सव के दूसरे दिन संगीत प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहेगा। मशहूर संगीतकार तिकड़ी शंकर-एहसान-लॉय अपनी प्रस्तुति देंगे। उनके सुरों में आधुनिकता और भारतीयता का मेल सुनने को मिलेगा। यह शाम खास तौर पर युवाओं और संगीत के शौकीनों के लिए यादगार बनने वाली है। 16 जनवरी की शाम गायिका सोना महापात्रा की दमदार आवाज गूंजेगी। उनके गीतों में शिव भक्ति और सूफी संगीत का अनोखा संगम सुनाई देगा। इसी दिन कोरकू, भील और बैगा जनजातीय नृत्य दल भी अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से मंच को सजाएंगे। यह दिन लोक और आधुनिक संगीत के बीच सेतु का काम करेगा।
शास्त्रीय सुरों में डूबेगी शिव नगरी
17 जनवरी को शास्त्रीय और समकालीन संगीत की विशेष संध्या आयोजित होगी। विभिन्न कलाकार शिव भजनों और आध्यात्मिक रचनाओं के जरिए वातावरण को भक्तिमय बनाएंगे। इस दिन संगीत के गंभीर श्रोताओं के लिए सुकून और साधना का अनुभव होगा। 18 जनवरी को महोत्सव का समापन शिव केंद्रित नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियों के साथ किया जाएगा। कथक कली सहित अन्य शास्त्रीय नृत्य शैलियों के जरिए भगवान शिव के विविध रूपों और कथाओं को मंच पर जीवंत किया जाएगा। यह समापन दर्शकों को कला, आस्था और भावनाओं की गहराई से जोड़ने वाला होगा।
