उज्जैन | मध्य प्रदेश के उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकाल मंदिर के पास पर्यटन विभाग ने भव्य “सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल” तैयार किया है, जो प्रदेश की अब तक की सबसे महंगी हेरिटेज होटल मानी जा रही है। करीब 17.90 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह आलीशान होटल आधुनिकता और ऐतिहासिकता का संगम है, लेकिन श्रावण मास में बढ़ी भीड़ ने इस होटल तक पहुंचना खुद में एक चुनौती बना दिया है।
कमरे शानदार, रास्ता बेहाल
होटल में कुल 17 कमरे हैं। जिसमें 9 सुइट्स, 6 डीलक्स और 2 सुपर डीलक्स है, जिनकी कीमतें 10,000 रुपये से शुरू होकर 29,500 रुपये तक जाती हैं। लक्जरी का हर तामझाम यहां मौजूद है, लेकिन असल दिक्कत है होटल तक पहुंचने की। महाकाल क्षेत्र की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के चलते होटल से सटे सारे रास्तों पर बेरिकेड्स लगा दिए गए हैं। नतीजतन, पर्यटक अपने वाहनों से उज्जैन तो पहुंच जाते हैं, लेकिन होटल के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाते।
पैदल ही ढोया जा रहा सामान
मार्ग अवरुद्ध होने की वजह से होटल के कर्मचारी पार्किंग से मेहमानों का सामान हाथों में उठाकर या ट्रॉली पर खींचकर होटल तक ला रहे हैं। ई-कार्ट्स भी चालू नहीं हैं, जिससे असुविधा और भी बढ़ जाती है। पर्यटकों को जो आराम और सुविधा इस होटल में मिलनी चाहिए थी, वह शुरुआत से ही असुविधा में बदल गई है।
होटल के रेस्टोरेंट खाली
होटल के रूफटॉप शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट की भी हालत कुछ खास नहीं है। महाकाल दर्शन को आए भक्तों को रेस्टोरेंट तक पहुंचने की अनुमति नहीं मिल रही, जिससे यहां की सीटें खाली पड़ी रहती हैं। श्रद्धालु होटल में बुकिंग तो करा रहे हैं, पर भोजन नहीं कर पा रहे।
प्रशासन देगा समाधान का भरोसा
मामले में एडीएम और महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने कहा है कि सावन सोमवार और नागपंचमी जैसे आयोजनों के चलते भीड़ नियंत्रण ज़रूरी था, लेकिन अब पार्किंग से होटल तक ई-कार्ट सेवा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है ताकि पर्यटक और श्रद्धालु सहजता से होटल तक पहुंच सकें।
30 मार्च को मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस ऐतिहासिक होटल का शुभारंभ किया था। मराठा स्थापत्य कला से सजी यह इमारत हाईटेक ऑटोमेशन सिस्टम और पारंपरिक डिज़ाइन का मिश्रण है। लेकिन जब तक रास्ते आसान नहीं होते, तब तक यह भव्यता भी अधूरी ही रहेगी।
