उज्जैन रेलवे स्टेशन पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब महाकाल दर्शन के लिए आए एक युवा श्रद्धालु की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्लेटफॉर्म यात्रियों से भरा हुआ था और ट्रेन के आगमन की हलचल के बीच किसी ने सोचा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में जिंदगी और मौत की जंग शुरू हो जाएगी। घटना 1 दिसंबर की है। उज्जैयनी एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचते ही ब्यावरा निवासी देवी सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई। घबराहट बढ़ी और देखते ही देखते वह प्लेटफॉर्म पर अचेत होकर गिर पड़ा। आसपास खड़े लोग समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें, किसी ने हार्ट अटैक तो किसी ने मिर्गी के दौरे की आशंका जताई।
इसी बीच प्लेटफॉर्म नंबर 5 और 6 के बीच तैनात जीआरपी के प्रधान आरक्षक पवन धुर्वे की नजर घटना पर पड़ी। बिना वक्त गंवाए उन्होंने स्थिति को समझा और तुरंत यात्री की मदद के लिए आगे बढ़े। न एंबुलेंस थी, न डॉक्टर, लेकिन निर्णय लेने का वक्त वही था।
उज्जैन: गोल्डन टाइम में लिया फैसला
स्टेशन पर तत्काल चिकित्सा सुविधा न होने के बावजूद पवन धुर्वे ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मौके पर ही सीपीआर देना शुरू किया। कुछ सेकेंड और मिनट बेहद अहम थे। लगातार प्रयास के बाद यात्री के शरीर में हलचल दिखी और उसकी सांसें लौटने लगीं। सीपीआर के दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों और परिजनों की निगाहें एक ही जगह टिकी थीं। हर कोई दुआ कर रहा था कि युवक की जान बच जाए। जैसे ही यात्री को होश आता दिखा, लोगों ने राहत की सांस ली और माहौल में तालियों की आवाज गूंज उठी।
घटना CCTV में कैद
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें प्रधान आरक्षक सीपीआर देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में यात्री के परिजन भी दिखाई दे रहे हैं, जिनके चेहरों पर डर और उम्मीद दोनों साफ झलक रहे हैं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर मानवता की मिसाल बन गया है। जीआरपी थाना प्रभारी अमित भावसार ने बताया कि प्रधान आरक्षक की सतर्कता और प्रशिक्षण के कारण एक अनमोल जान बच सकी। इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा उन्हें सम्मानित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और विभाग को पत्र भेजा गया है।
