उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में रागी (श्रीअन्न) से बने लड्डू को प्रसाद के रूप में वितरित करने की पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने इस अनूठी पहल का जिक्र करते हुए कहा कि आज कई मंदिर मिलेट्स को प्रसाद में शामिल कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य और परंपरा दोनों के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने इस प्रयास के लिए मंदिर प्रबंधन की प्रशंसा की और इसे प्रेरणादायक बताया।
महाकालेश्वर मंदिर में रागी से बने लड्डू प्रसाद की शुरुआत लगभग तीन माह पहले की गई थी। यह व्यवस्था दिवाली के अवसर पर 18 अक्टूबर से लागू की गई, ताकि श्रद्धालुओं को पौष्टिक और पारंपरिक अनाज से बना प्रसाद उपलब्ध कराया जा सके। यह पहल राज्य सरकार की मंशा और श्रीअन्न को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम मानी जा रही है।
महाकाल मंदिर के रागी लड्डू
रागी के लड्डू को श्रद्धालुओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, महज तीन महीनों में करीब 350 क्विंटल रागी के लड्डू बिक चुके हैं, जिससे डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित हुआ है। गुड़, शुद्ध देसी घी और सूखे मेवों से तैयार इन लड्डुओं की गुणवत्ता और स्वाद के चलते भक्तों में इसकी खास मांग बनी हुई है। वर्तमान में इन लड्डुओं को 400 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद
रागी से बने ये लड्डू सिर्फ आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी लाभकारी माने जा रहे हैं। रागी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक हैं। इसके अलावा यह आयरन से भरपूर होता है, जिससे एनीमिया की समस्या कम करने में मदद मिलती है। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने, त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी रागी उपयोगी माना जाता है।
महाकाल मंदिर की यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह श्रीअन्न यानी मोटे अनाज के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का भी एक सशक्त माध्यम बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अन्य धार्मिक स्थल भी इस तरह के पौष्टिक प्रसाद को अपनाएं, तो इससे पारंपरिक अनाज को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचेगा।
