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14 जनवरी से शुरू होगा श्री महाकाल महोत्सव, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में जुटेंगे देश-विदेश के विद्वान

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Published On: 13 January 2026

उज्जैन में श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की दिव्य छांव में 14 जनवरी से श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। पांच दिवसीय इस आयोजन में भक्ति, संस्कृति, ज्ञान और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। महोत्सव के दौरान ख्यातिप्राप्त गायक अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करेंगे, वहीं देश-विदेश से आए विद्वान शिव तत्त्व और महाकाल परंपरा पर गहन विचार-विमर्श करेंगे।

वीर भारत न्यास और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में 14 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले श्री महाकाल महोत्सव के अंतर्गत एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। यह संगोष्ठी 15 जनवरी, गुरुवार को त्रिवेणी कला व पुरातत्व संग्रहालय, जयसिंहपुरा, महाकाल लोक में सुबह 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक आयोजित होगी। इसमें शिव तत्त्व, श्री महाकाल के इतिहास, साहित्य और संस्कृति से जुड़े विषयों पर विद्वानों के व्याख्यान होंगे।

श्री महाकाल महोत्सव

संगोष्ठी के दौरान शिवोपासना, पुराख्यान, पुरातत्व, इतिहास, शैव दर्शन, साहित्य, वास्तु, मुद्राशास्त्र, शिल्प और चित्रकला जैसे विषयों पर गहराई से चर्चा की जाएगी। विद्वान अपने शोध और अनुभवों के माध्यम से ज्योतिर्लिंग परंपरा और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के वैश्विक महत्व को रेखांकित करेंगे।

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की खास बात यह है कि इसमें भारत के साथ-साथ 10 से अधिक देशों से विद्वान हिस्सा लेंगे। मॉरीशस, नीदरलैंड, फिजी, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों से आए विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। इससे भारतीय शैव परंपरा को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

देश के 12 से ज्यादा राज्यों की भागीदारी

भारत के भी 12 से अधिक राज्यों के विद्वान इस संगोष्ठी में सहभागिता करेंगे। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के विशेषज्ञ शिव तत्त्व और महाकाल संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखेंगे।

श्री महाकाल महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। आयोजकों का मानना है कि इस महोत्सव से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त होगी।

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