उज्जैन | रक्षाबंधन के त्योहार पर जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं, उसी भावना के साथ उज्जैन की धरती पर भी एक अनोखी परंपरा हर साल निभाई जाती है। यहां महाकाल नगरी स्थित प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में महिलाएं भगवान गणेश को अपना भाई मानकर उन्हें राखी भेजती हैं। इस वर्ष भी भारत के कोने-कोने से लेकर अमेरिका, हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों से सैकड़ों राखियां भगवान गणेश के नाम आई हैं।
वर्षों से चली आ रही परंपरा
ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास के अनुसार, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और समय के साथ इसकी आस्था और लोकप्रियता दोनों ही बढ़ी हैं। इस साल भी उज्जैन स्थित उनके निवास पर देश-विदेश से बहनों द्वारा भेजी गई राखियों का ढेर लग चुका है। कुछ राखियां डाक की देरी से अब भी रास्ते में हैं, लेकिन अधिकांश राखियां समय पर पहुंच चुकी हैं।
15 फीट ऊंची प्रतिमा को बांधी जाती है राखी
महाकाल मंदिर के समीप स्थित भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा, जिसे “बड़े गणेश” के नाम से जाना जाता है, श्रद्धालुओं की भावनाओं का विशेष केंद्र है। यहां गणेश जी को राखी बांधने की यह परंपरा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि विधिवत पूजन, मंत्रोच्चार और आस्था के साथ निभाई जाती है।
सोने की गिन्नी वाली राखी बनी आकर्षण
हर साल की तरह इस बार भी मुंबई निवासी राजकुमारी जैन द्वारा भेजी गई सोने की गिन्नी जड़ी राखी विशेष चर्चा में रही। यह राखी गणेश जी के साथ-साथ रिद्धि और सिद्धि को भी अर्पित की जाएगी। इसके अलावा इंदौर, भोपाल, बेंगलुरु और जयपुर से भी कई बहनों ने राखियां भेजी हैं, जिनमें कुछ पारंपरिक और कुछ आधुनिक डिज़ाइन की हैं।
9 अगस्त को होगा पूजन
पंडित व्यास ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन सभी राखियों को विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश, रिद्धि और सिद्धि को बांधा जाएगा। यह आयोजन हर साल न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी देश-विदेश की बहनों को उज्जैन से जोड़ता है।
