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नए साल से पहले आस्था का महासैलाब: महाकाल से मैहर तक श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़, होटल फुल

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Published On: 29 December 2025

नए साल की आहट के साथ ही MP के धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आस्था और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। प्रदेश में श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी भीड़ भगवान महाकाल के दरबार में उमड़ रही है। उज्जैन का महाकाल लोक हो या इंदौर का खजराना गणेश मंदिर, मैहर माता का धाम हो या काल भैरव मंदिर हर जगह भक्तों की संख्या रोज़ाना बढ़ती जा रही है।

उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में इस बार नए साल के मौके पर रिकॉर्ड भीड़ पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि केवल कुछ दिनों में 10 से 12 लाख श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंच सकते हैं। सामान्य दिनों में जहां रोज़ाना करीब सवा लाख श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं, वहीं वीकेंड पर यह संख्या डेढ़ से दो लाख तक पहुंच चुकी है।

विशेष बदलाव

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए महाकाल मंदिर सहित खजराना गणेश, काल भैरव और मैहर माता मंदिर में दर्शन व्यवस्थाओं में बदलाव किए गए हैं। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण, कतार व्यवस्था और सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए हैं ताकि भक्तों को सुगम और सुरक्षित दर्शन मिल सकें। पुलिस और स्वयंसेवकों की तैनाती भी बढ़ाई गई है। धार्मिक स्थलों के साथ-साथ प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्र भी पर्यटकों से गुलजार होने लगे हैं। कान्हा, बांधवगढ़ और खजुराहो जैसे डेस्टिनेशन पर पर्यटकों की आमद तेजी से बढ़ी है। जंगल सफारी से लेकर ऐतिहासिक धरोहरों तक, हर जगह नए साल का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है।

हुआ मुश्किल

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ का असर होटल बुकिंग पर भी साफ नजर आ रहा है। मंदिरों के आसपास स्थित ज्यादातर होटल पहले ही फुल हो चुके हैं। शहर के बाहरी इलाकों में ही अब सीमित संख्या में कमरे उपलब्ध हैं। आसपास की धर्मशालाओं में भी भीड़ है, जबकि ऑनलाइन बुकिंग वाली धर्मशालाएं लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं। कई स्थानीय घरों में संचालित गेस्ट रूम ही फिलहाल राहत का विकल्प बन रहे हैं।

प्रशासन का अनुमान

महाकाल मंदिर प्रशासन का कहना है कि 25 दिसंबर से 31 जनवरी के बीच करीब 6 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जबकि नए साल के आसपास यह संख्या 12 लाख तक जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने ट्रैफिक, पार्किंग, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े इंतजाम पहले ही मजबूत कर दिए हैं। इस बार मध्यप्रदेश में नया साल सिर्फ जश्न का नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और पर्यटन के बड़े उत्सव के रूप में नजर आ रहा है। बाबा महाकाल के जयकारों से लेकर जंगल सफारी की रोमांचक यात्राओं तक, पूरा प्रदेश नए साल के स्वागत में पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहा है।

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