देशभर में प्रतिवर्ष बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त मानकर विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य होते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष यह परंपरा टूटती नजर आएगी। 23 जनवरी, शुक्रवार को आने वाली बसंत पंचमी पर विवाह का कोई शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है। धार्मिक और ज्योतिषीय कारणों के चलते इस दिन शादी-विवाह जैसे संस्कार वर्जित माने गए हैं, जिससे कई परिवारों को अपनी योजनाएं टालनी पड़ी हैं।
इस बार बसंत पंचमी पूर्व भाद्रपद नक्षत्र, परिघ योग और कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करते चंद्रमा की साक्षी में रहेगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार, जब शुक्र या गुरु तारा अस्त होता है, तब विवाह जैसे संस्कार नहीं किए जाते। इसी कारण इस वर्ष बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त होने के बावजूद विवाह का योग नहीं बन पाया है।
बसंत पंचमी पर नहीं बजेगी शहनाई
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी कहा जाता है। इसी दिन खटवांग जयंती और तक्षक पंचमी का संयोग भी रहता है। सामान्य परिस्थितियों में यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है, लेकिन शुक्र तारा अस्त होने से इस बार विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य संभव नहीं होंगे। मालवा-निमाड़ ही नहीं, पूरे देश में इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
मां सरस्वती की आराधना का पर्व
बसंत पंचमी बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित पर्व है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पीले वस्त्र, पीले पुष्प, बूंदी के लड्डू, मालपुआ, खीर और पीले चावल अर्पित किए जाते हैं। बसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक इस पर्व पर वैष्णव मंदिरों में फाग महोत्सव की शुरुआत भी होती है, जहां भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है।
अधिक मास और विवाह पर असर
इस वर्ष अधिक मास ज्येष्ठ माह में 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस अवधि में भी विवाह जैसे कार्य वर्जित रहेंगे। शुद्ध ज्येष्ठ मास के आरंभ के बाद विवाह के योग पुनः बनेंगे, हालांकि परंपरा के अनुसार बड़े बेटे या बड़ी बेटी का विवाह ज्येष्ठ मास में नहीं किया जाता।
महाकाल मंदिर में विशेष आयोजन
बसंत पंचमी पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भस्म आरती में पीले और बसंती पुष्प अर्पित होंगे, वहीं संध्या आरती में गुलाल समर्पित किया जाएगा। सांदीपनि आश्रम में भी विशेष आयोजन होंगे, जहां भगवान कृष्ण और बलराम को पीले वस्त्र धारण कराए जाएंगे। इस अवसर पर विद्यारंभ संस्कार कर बच्चों को मां सरस्वती का आशीर्वाद दिलाया जाएगा।
