उज्जैन के गणगौर दरवाजे के सामने लगे सरकारी नल से पानी में कीड़े निकलने का वीडियो रविवार को वायरल होने के बाद उज्जैन नगर निगम की कार्यवाही विवादित बन गई। शिकायत के बावजूद पीएचई कर्मचारियों ने नल की पाइपलाइन की मरम्मत करने की बजाय नल कनेक्शन ही काट दिया। इस नल से रोजाना सैकड़ों लोग पानी भरते थे, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।
वार्ड 21 के कार्तिक चौक सिंह पुरी, खटीक वाड़ा में पिछले कई महीनों से गंदा पानी सप्लाई हो रहा है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बावजूद उज्जैन की पाइपलाइन में दूषित पानी सप्लाई जारी है।
उज्जैन: कीड़े वाले नल का कनेक्शन काटा
महापौर मुकेश टटवाल ने नल कनेक्शन काटने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि पानी में पेड़ों की जड़ें आ रही थीं। इसलिए कनेक्शन काट दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में अब बोरिंग से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि मौके पर कोई बोरिंग नजर नहीं आई, जिससे नागरिकों में असमंजस और चिंता बनी हुई है।
बुधवार को जल कार्य समिति प्रभारी प्रकाश यादव ने दावा किया था कि घरों में साफ पानी सप्लाई हो रहा है। लेकिन नल कनेक्शन काटने के बाद लोगों को वास्तविक रूप से पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। नागरिकों ने नगर निगम की इस कार्यवाही को अपर्याप्त और असंतोषजनक बताया।
नागरिकों की चिंता
स्थानीय लोगों ने कहा कि नल की मरम्मत के बजाय कनेक्शन काटने से उन्हें रोजाना पीने और घरेलू कामकाज के लिए पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि नगर निगम को पाइपलाइन की जांच और मरम्मत करके सुरक्षित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। पर्यावरण और जल विशेषज्ञों ने कहा कि पाइपलाइन में जड़ें या दूषित पानी आने की समस्या के लिए नल कनेक्शन काटना समाधान नहीं है। इसके बजाय मरम्मत और नियमित जल परीक्षण आवश्यक है।
