इंदौर में दूषित पानी से हुई 15 मौतों और बढ़ती सियासत के बाद उज्जैन नगर निगम ने सतर्कता बढ़ा दी है। शहर में गंदे पानी की लगातार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र ने अनोखा कदम उठाया। उन्होंने खुद उपभोक्ता बनकर जल प्रदाय हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाई, ताकि सिस्टम की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके। गुरुवार को नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र ने चामुंडा माता स्थित पीएचई कार्यालय और कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों की मौजूदगी में हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया और कहा, “मैं अभिलाष, वार्ड 22 में रहता हूं। मेरे यहां गंदा पानी आ रहा है, कब तक सही हो जाएगा?” हेल्पलाइन स्टाफ ने शिकायत मिलते ही मौके पर इंजीनियर भेजने का आश्वासन दिया। इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया है।
नगर निगम के निर्देश पर शहर में पानी की टंकियों की सफाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। पीएचई विभाग ने सुभाषनगर, चकोर पार्क, लक्ष्मीनगर, मिर्ची नाला, भैरवगढ़ और रविशंकर नगर समेत कई इलाकों की टंकियों की अंदरूनी सफाई कराई।
कई इलाकों में समस्या
इंदौर की घटना के बाद उज्जैन में भी लोग गंदे पानी को लेकर सतर्क हैं। शुक्रवार को ऋषि नगर की पानी की टंकी करीब आठ महीने बाद साफ की गई। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में पाइपलाइन लीकेज की समस्या बनी हुई है। क्षीरसागर क्षेत्र से गुरुवार को दो नई शिकायतें दर्ज हुईं, वहीं पंवासा, नागझिरी, सिंधी कॉलोनी और छत्री चौक समेत अन्य इलाकों में भी गंदे पानी की समस्या की शिकायतें मिल रही हैं। अभिलाष मिश्र ने बताया कि सभी टंकियों की नियमित सफाई और पाइपलाइन लीकेज को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएचई कार्यालय में आने वाली शिकायतों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए खुद फोन कर फीडबैक ले रहे हैं।
उज्जैन प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन का दावा है कि अब गंदे पानी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य है कि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके और उज्जैन के नागरिक सुरक्षित पेयजल का लाभ उठा सकें।
