उज्जैन के कालिदास अकादमी परिसर में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय ठहाका महोत्सव का रंगारंग आगाज हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत ‘शंभू शिव-शिव’ गीत पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति के साथ हुई, जिसने दर्शकों को पहले ही पल में उत्सव से जोड़ दिया। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में हास्य, व्यंग्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।महोत्सव के पहले दिन से ही मंच पर हास्य का माहौल बना रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कवि और हास्य कलाकारों ने अपनी रचनाओं और प्रस्तुतियों से दर्शकों को जमकर गुदगुदाया। कार्यक्रम में शुद्ध हास्य के साथ सामाजिक व्यंग्य की भी झलक देखने को मिली, जिससे लोग हंसते-हंसते सोचने पर भी मजबूर हुए।
महोत्सव के समापन अवसर पर फिल्म अभिनेता आशीष विद्यार्थी और प्रसिद्ध कॉमेडियन रजत सूद की मौजूदगी खास आकर्षण रहेगी। आयोजकों के अनुसार, समापन सत्र में हास्य और संवाद का ऐसा मेल होगा, जो दर्शकों के लिए यादगार बनेगा।
उज्जैन में ठहाकों की गूंज
कार्यक्रम में पूर्व विधायक महंत राजेन्द्र भारती, समाजसेवी रवि सोलंकी, नेता प्रतिपक्ष रवि राय, भाजपा शहर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, नगर निगम सभापति कलावती यादव और विशेष अतिथि राजू सेठ सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। मंच से सभी अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया गया। अतिथियों ने इस तरह के आयोजनों को समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाला बताया।
ठहाका सम्मान
महोत्सव के दौरान समाजसेवी रवि सोलंकी को “ठहाका सम्मान” प्रदान किया गया। आयोजकों ने उनके सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका की सराहना की। सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा कि हंसी लोगों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। दर्शकों के मनोरंजन के लिए ‘ठहाका अदालत’ का आयोजन भी किया गया। इसमें हास्यपूर्ण अंदाज में राजू सेठ पर काल्पनिक आरोप लगाए गए, जिनका जवाब भी मजाकिया शैली में दिया गया। इस कार्यक्रम ने पूरे सभागार को ठहाकों से भर दिया।
बुंदेलखंडी हास्य ने जीता दिल
बाल कवि वेद पस्तोर ने बुंदेलखंडी भाषा में अपनी हास्य रचना प्रस्तुत की। उनकी सरल और चुटीली शैली को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। अंतर्राष्ट्रीय ठहाका महोत्सव का आयोजन संस्थापक एवं संयोजक डॉ. महेन्द्र यादव के नेतृत्व में किया जा रहा है। इसमें देश और विदेश से आए कवि, हास्य कलाकार और फिल्म जगत की हस्तियां भाग ले रही हैं। आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव उज्जैन को हास्य और संस्कृति के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिला रहा है।
