बसंत पंचमी के अवसर पर उज्जैन की सिंहपुरी गली शुक्रवार को पूरी तरह पीले रंग की आभा में रंगी नजर आई। गली के कोने-कोने में बसंत का उल्लास और श्रद्धा का माहौल दिखाई दिया। सुबह से ही यहां स्थित करीब 500 साल पुराने माता सरस्वती मंदिर में बच्चों, विद्यार्थियों और उनके परिजनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर में छोटे बच्चों से लेकर बड़े छात्रों तक ने माता सरस्वती से बुद्धि, स्मरण शक्ति और शिक्षा में सफलता का आशीर्वाद मांगा। आने वाली परीक्षाओं और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ विद्यार्थियों ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। कई अभिभावक भी अपने बच्चों के साथ पहुंचे और उनकी प्रगति व सफलता के लिए प्रार्थना की।
बसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर में विद्यार्थियों के लिए विशेष पूजा का आयोजन किया गया। मान्यता के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती स्वयं ज्ञान का वरदान देती हैं। इसी आस्था के चलते बच्चों ने माता की प्रतिमा पर स्याही अर्पित की और अपनी कलम, किताबें तथा अध्ययन सामग्री चरणों में समर्पित की। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और विद्यार्थियों के बीच विशेष महत्व रखती है।
उज्जैन की सिंहपुरी गली
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने पीले फूल, पीले चावल और प्रसाद अर्पित किया। मंदिर परिसर पीले वस्त्रों और बसंती सजावट से सजा रहा। श्रद्धालुओं का मानना है कि बसंत पंचमी पर स्याही चढ़ाने से स्मरण शक्ति तेज होती है और अध्ययन में एकाग्रता बढ़ती है। इस परंपरा के चलते मंदिर में पूरे दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
आस्था का केंद्र
मंदिर के पंडित अनिल मोदी के अनुसार, मंदिर में विराजित माता सरस्वती की पाषाण प्रतिमा मुगल काल की है और इसका ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। उन्होंने बताया कि वर्षों से चली आ रही स्याही अर्पण की परंपरा विद्यार्थियों के बीच आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुकी है। इसी गहरी आस्था और विश्वास के कारण सिंहपुरी गली स्थित यह प्राचीन सरस्वती मंदिर हर साल बसंत पंचमी पर विद्यार्थियों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन जाता है। शिक्षा से जुड़े हर वर्ग के लोग यहां मां सरस्वती का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं और इस पावन पर्व को ज्ञान, भक्ति और उम्मीद के साथ मनाते हैं।
