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उज्जैन के विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में शिक्षक संकट मामला पहुंचा HC, लॉ के छात्रों ने खुद की पैरवी

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Published On: 12 December 2025

उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट में शिक्षकों की भारी कमी का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। विरोध-प्रदर्शनों के बाद भी समाधान न मिलने पर छात्रों ने स्वयं ही हाईकोर्ट में याचिका दायर की और पैरवी भी खुद कर रहे हैं। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

लॉ डिपार्टमेंट में 637 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं और पिछले दो महीनों से फैकल्टी की कमी को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। छात्रों ने कई बार ज्ञापन दिए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। विरोध के दौरान वे कभी विभाग के गेट पर ताला लगाते, कभी परिसर में भैंस चराकर प्रशासन की अनदेखी पर विरोध जताते रहे। आखिरकार मजबूर होकर छात्रों ने न्यायालय की शरण ली।

3 शिक्षकों का बोझ

याचिका की पैरवी एलएलबी सेकंड ईयर के छात्र दीपक कुमार यादव कर रहे हैं। दीपक बताते हैं कि डेढ़ साल पहले यहां पांच फैकल्टी थीं, जिनमें से तीन का ट्रांसफर कर दिया गया। नियमों के अनुसार, लॉ डिपार्टमेंट को संचालित करने के लिए कम से कम 10 फैकल्टी आवश्यक हैं, लेकिन वर्तमान में विभाग में केवल तीन ही फेकल्टी पढ़ा रहे हैं। इतना ही नहीं, डिपार्टमेंट में रोज़ाना 11 बैचों की कुल 55 क्लासेस लगनी होती हैं, जिन्हें संभालना सिर्फ तीन शिक्षकों के लिए लगभग असंभव है। छात्रों का कहना है कि यह स्थिति पिछले डेढ़ साल से बनी हुई है, जबकि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं मिला।

नोटिस जारी

21 नवंबर को दायर याचिका पर 28 नवंबर को पहली सुनवाई हुई। दीपक कुमार ने अदालत में विस्तार से बताया कि कैसे 637 छात्रों की पढ़ाई फैकल्टी की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। उनकी दलीलों के बाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन, बीसीआई और उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान दीपक कोर्ट में पेशेवर वकील की तरह प्रस्तुत हुए। उन्होंने बताया कि उज्जैन कोर्ट में की गई इंटर्नशिप ने उनकी काफी मदद की।

अन्य राज्यों से भी आते हैं छात्र

डिपार्टमेंट में पढ़ने वाले छात्रों के अनुसार, प्रति सेमेस्टर लगभग 29,700 रुपए फीस है, जो परीक्षा शुल्क सहित लगभग 32,000 रुपए तक पहुंच जाती है। यहां मध्यप्रदेश के अलावा यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात सहित कई राज्यों के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों ने कहा कि इतनी फीस देने के बाद भी उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही, इसलिए अब न्यायालय से ही उम्मीद बची है।

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