कीमती धातुओं के बाजार में गुरुवार का दिन चांदी निवेशकों के लिए चौंकाने वाला साबित हुआ। लगातार रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद चांदी एक ही दिन में ऐसी फिसली कि कारोबारियों से लेकर निवेशकों तक में हलचल मच गई। बाजार बंद होते-होते चांदी ने एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज कर ली, जिसे हाल के वर्षों की ऐतिहासिक गिरावट माना जा रहा है। गुरुवार को चांदी के दाम में 12,174 रुपये प्रति किलो की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस तेज गिरावट के बाद चांदी का भाव लुढ़ककर 2,35,826 रुपये प्रति किलो पर आ गया। जिस चांदी ने हाल ही में नई ऊंचाइयों को छुआ था, उसी में इतनी बड़ी टूट ने बाजार की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीते तीन महीनों में चांदी की कीमतों में यह पांचवां बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि इन झटकों के बीच एक अहम तथ्य यह भी है कि इसी अवधि में चांदी करीब 83 हजार रुपये तक मजबूत भी हुई थी। यानी तेजी और मंदी, दोनों का खेल बराबरी से चलता रहा और निवेशकों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत पड़ी।
चांदी में गिरावट
इससे पहले 22 अक्टूबर को भी चांदी ने बड़ा गोता लगाया था। उस दौरान अक्टूबर महीने में चांदी 10,549 रुपये प्रति किलो टूटकर 1,52,501 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। उस समय भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, जिसने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया था। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और मुनाफावसूली जैसे कारण चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेत भी चांदी के भाव को तेजी से ऊपर-नीचे कर रहे हैं।
लंबी अवधि में चांदी का दम बरकरार
हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद चांदी ने लंबी अवधि में निवेशकों को निराश नहीं किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक साल में चांदी ने सोने के मुकाबले लगभग दोगुना रिटर्न दिया है। यही वजह है कि बड़े उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी चांदी में बनी हुई है। बाजार जानकारों का मानना है कि मौजूदा गिरावट घबराने की नहीं, बल्कि समझदारी से फैसले लेने की जरूरत बताती है। चांदी में तेजी और मंदी का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है, ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
