CBSE का बड़ा बदलाव, 2026 से बदल जाएगा पढ़ाई का तरीका; अब 9वीं में होगी ओपन बुक परीक्षा

Author Picture
Published On: 11 August 2025

नई दिल्ली | केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 में ओपन बुक असेसमेंट (Open Book Assessment – OBA) लागू किया जाएगा। इस नए मूल्यांकन तरीके का उद्देश्य छात्रों को रटने के बजाय सोचने, समझने और विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करना है। यह पहल राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCFSE 2023) के तहत की जाएगी, जिससे पढ़ाई अधिक व्यावहारिक और ज्ञान-आधारित बनेगी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शिक्षा पद्धति में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। अब छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा का तरीका रटने पर आधारित न होकर सोचने और समझने की क्षमता पर केंद्रित होगा।

ओपन बुक असेसमेंट (OBA) 

ओपन बुक असेसमेंट (OBA) एक नई परीक्षा प्रणाली है जिसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 में शैक्षणिक सत्र 2026–27 से लागू करने का निर्णय लिया है। इस पद्धति में छात्र परीक्षा के दौरान अपनी किताबें और नोट्स साथ रख सकेंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सवाल आसान होंगे बल्कि, यह रटने की बजाय तथ्यों की गहराई में जाकर उनका विश्लेषण, समझ और व्यावहारिक सोच को परखने पर जोर देगा। छात्रों को केवल उत्तर लिखने की अपेक्षा नहीं, बल्कि सोचने, समझने और लागू करने की क्षमता का आकलन किया जाएगा।

इस तरह होगी परीक्षा

नई परीक्षा प्रणाली के तहत साल में तीन बार पेन-पेपर मोड में टेस्ट आयोजित होंगे, जो भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों पर आधारित होंगे। परीक्षा के समय छात्रों के पास किताबें मौजूद होंगी, लेकिन प्रश्न ऐसे होंगे जिन्हें सिर्फ किताब से देखकर हल नहीं किया जा सकेगा। इन्हें हल करने के लिए गहरी समझ, विश्लेषण क्षमता और तार्किक सोच की आवश्यकता होगी।

नया सीखने का मॉडल

CBSE का यह बदलाव छात्रों को रटने की आदत से बाहर निकालकर उन्हें समझदारी से सीखने की दिशा में ले जाने के उद्देश्य से किया गया है। ओपन बुक असेसमेंट (OBA) का मुख्य मकसद रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना, पढ़ाई को रियल-लाइफ सिचुएशंस से जोड़ना और छात्रों को मेमोरी बेस्ड लर्निंग से हटाकर कांसेप्ट बेस्ड लर्निंग की ओर बढ़ाना है। इससे विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक और तार्किक सोच विकसित होगी, जिससे वे सिर्फ याद करने के बजाय विषय को गहराई से समझ पाएंगे।

फिलहाल यह योजना केवल कक्षा 9 में लागू होगी, लेकिन सफल रहने पर इसे अन्य कक्षाओं में भी अपनाया जा सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश में, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव अत्यधिक है, यह बदलाव छात्रों के मानसिक और शैक्षणिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।

छात्रों को होने वाले फायदे

  • किताबों की मदद से परीक्षा देने पर याद करने का मानसिक दबाव घटेगा।
  • रट्टा मारने के बजाय सवाल को समझकर जवाब देने की आदत बनेगी।
  • विषयों की गहराई में जाने की आदत विकसित होगी, जो आगे की पढ़ाई और करियर में मददगार होगी।
  • सीखी गई चीज़ों को असल जीवन में लागू करने की बेहतर समझ होगी।
Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp