तकनीक और इनोवेशन की दुनिया में नए प्रयोगों के लिए पहचाने जाने वाले एलन मस्क ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है। मस्क ने दावा किया है कि उनका एआई टूल Grok अब मेडिकल इमेज देखकर बीमारी का आकलन करने में सक्षम है। उनके इस बयान के बाद हेल्थ सेक्टर और टेक इंडस्ट्री दोनों में हलचल मच गई है। एलन मस्क के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपना एक्स-रे या MRI स्कैन Grok पर अपलोड करता है, तो यह एआई सिस्टम संभावित बीमारी या समस्या के बारे में जानकारी दे सकता है। मस्क ने कहा कि उन्होंने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं, जहां Grok का विश्लेषण डॉक्टरों की राय से भी अधिक सटीक साबित हुआ। इस दावे ने एआई की क्षमताओं को लेकर लोगों की जिज्ञासा और चिंता दोनों बढ़ा दी हैं।
मस्क ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में Grok ने उन मेडिकल स्थितियों को पहचाना, जिन्हें अनुभवी डॉक्टर भी तुरंत समझ नहीं पाए। उनके मुताबिक, यह एआई बड़े पैमाने पर मेडिकल डेटा, इमेज पैटर्न और रिसर्च के आधार पर बेहद बारीकी से निष्कर्ष निकालता है, जिससे कई बार यह इंसानी समझ से आगे निकल जाता है।
एलन मस्क का दावा
एलन मस्क ने अपने दावे को मजबूत करते हुए एक खास घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले साल नॉर्वे में Grok ने एक व्यक्ति की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उस व्यक्ति की बीमारी को कई डॉक्टर पहचान नहीं पाए थे, लेकिन Grok ने इमेज एनालिसिस के जरिए एक घातक समस्या की ओर इशारा किया, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सका।
xAI की चेतावनी भी अहम
मस्क के दावे जितने रोमांचक हैं, उतनी ही सावधानी की सलाह भी दी जा रही है। Grok बनाने वाली कंपनी xAI खुद स्पष्ट कर चुकी है कि उनके एआई टूल का इस्तेमाल मेडिकल सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक केवल सहायक भूमिका निभा सकती है, अंतिम फैसला हमेशा योग्य डॉक्टरों द्वारा ही किया जाना चाहिए।
मेडिकल और टेक जगत में नई बहस
मस्क के इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या भविष्य में एआई डॉक्टरों की भूमिका को बदल देगा या केवल उनका सहायक बनेगा। कुछ विशेषज्ञ इसे मेडिकल क्षेत्र में क्रांति मान रहे हैं, तो कुछ इसे जोखिम भरा प्रयोग बता रहे हैं। फिलहाल इतना तय है कि Grok और एआई आधारित डायग्नोसिस ने आने वाले समय की हेल्थकेयर तस्वीर को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
